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राशनकार्ड दिलाने के नाम पर नेत्रहीन महिला से भी बिचौलिए कर रहे वसूली.

दुमका, शौरभ सिन्हा

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पाकुड़ : अमड़ापाड़ा प्रखंड क्षेत्र में बिचौलिए आदिम जनजाति का बुरी तरह से शोषण कर रहे हैं। मानवता को तार तार करने वाला कई मामला यहाँ दिख जाएगा। प्रखंड क्षेत्र के गौरपाड़ा गाँव में पीडीएस का राशन कार्ड दिलाने के नाम पर गाँव के ही एक बिचौलिया करीब दर्जन भर से अधिक लोगों से एक हजार से लेकर दो हजार रुपये प्रति व्यक्ति उगाही कर चुके है। बिचौलियों ने बड़ी ही चालाकी से लोगों को दिग्भ्रमित कर कार्ड बनवाने के लिए पैसे की उगाही की है और कार्ड भी मुहैया कराया है।

उगाही को लेकर पड़ताल
गांव के सीताराम पहाड़िया ने करीब दो वर्ष पूर्व राशनकार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। जानकारी के अभाव में उसे पता ही नहीं चल पाया कि उसके नाम पर राशन कार्ड जारी हो चुका है। इसी बात का फायदा उठाकर गाँव के ही रमेश पहाड़िया ने दो माह पूर्व सीताराम पहाड़िया से कहा कि एक हजार रुपये लगेगा और तुम्हारा कार्ड बन जाएगा। सीताराम ने रमेश को पैसा दे दिया।पैसा लेने के 2-3 दिन बाद ही सीताराम को राशनकार्ड मिल गया।

विधवा पेंशन के नाम पर उगाही
विधवा पेंशन के सहारे गुजर बसर करने वाली सोबनी पहाड़िन से भी रमेश पहाड़िया ने राशनकार्ड बनवाने के एवज में 18 सौ रुपये ऐंठ लिया तब जाकर सोबनी पहाड़िन को राशन कार्ड मिला।

नेत्रहीन से भी बिचौलिए ने की वसूली
गौरपाड़ा गांव की नेत्रहीन भवानी पहाड़िन बड़े ही मुश्किलों से अपना जीवनयापन कर रही है।भवानी पहाड़िन ने बताया कि रमेश पहाड़िया ने राशनकार्ड दिलवाने के नाम पर दो किस्तों में 11 सौ रुपये लेने के बाद उसे राशनकार्ड उपलब्ध कराया।

क्या कहना है रमेश पहाड़िया का
इस बाबत संपर्क करने पर रमेश पहाड़िया ने कहा कि ये आरोप बेबुनियाद हैं।राशन कार्ड का ऑनलाइन फॉर्म भरने और पाकुड़ जाकर राशनकार्ड लाने के लिए आवेदकों ने अपनी मर्जी से 2 – 3 सौ रुपया दिया था।

क्या कहते हैं अधिकारी
प्रभारी एमओ अभय कुमार ने इस बाबत पूछे जाने पर कहा कि इस तरह की कोई भी सूचना मेरे जानकारी में नहीं है।लेकिन अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है तो नियमानुसार कारवाई की जाएगी। साथ ही कहा कि राशनकार्ड के लिए किसी भी प्रकार से पैसा नहीं लगता है।

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