झारखंड विधानसभा: हाथियों के आतंक पर सदन में चिंता, 25 लाख मुआवजे और 4 घंटे में रिस्पांस की तैयारी
झारखंड विधानसभा: हाथियों के आतंक पर सदन में चिंता, 25 लाख मुआवजे और 4 घंटे में रिस्पांस की तैयारी

रांची: झारखंड में हाथियों और जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक ने सरकार की नींद उड़ा दी है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक रामेश्वर उरांव ने इस गंभीर मुद्दे को ध्यानाकर्षण के जरिए सदन के पटल पर रखा। चर्चा इतनी गंभीर थी कि स्वयं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हस्तक्षेप करते हुए सरकार का पक्ष रखा और भविष्य की ठोस कार्ययोजना का खाका पेश किया।

मुआवजे की राशि पर खींचतान: 4 लाख बनाम 25 लाख
विधायक रामेश्वर उरांव ने सदन में सवाल उठाया कि जब अन्य राज्यों में वन्यजीवों के हमले में जान गंवाने वालों को 20 से 25 लाख रुपये तक का मुआवजा मिलता है, तो झारखंड में यह राशि मात्र 4 लाख रुपये क्यों है? उन्होंने कहा कि हाथियों के डर से ग्रामीण दहशत में हैं और उनके जीवन की कीमत को समझा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री का जवाब: सिर्फ हाथी नहीं, हर जान की कीमत
चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह समस्या केवल हाथियों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा:
”पर्यावरण और जीवनशैली में आ रहे बदलावों के कारण जंगली जानवर रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। हम एक ऐसी ‘मजबूत स्कीम’ तैयार कर रहे हैं जिसमें हाथी के साथ-साथ सांप, लकड़बग्घा और अन्य आक्रामक जानवरों के हमले को भी शामिल किया जाएगा।”
मुख्यमंत्री के संबोधन की 3 बड़ी बातें:
रिस्पांस टाइम फिक्स होगा: सीएम ने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है जिससे घटना की सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारी 1 से 4 घंटे के भीतर मौके पर पहुंचें और तुरंत राहत कार्य शुरू करें।
ट्रेंड एनालिसिस: सरकार साल 2020-21 से लेकर अब तक के आंकड़ों का अध्ययन (Study) कर रही है ताकि जानवरों के मूवमेंट के पैटर्न को समझा जा सके।
खनन पर नजर: मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि हाथियों के प्राकृतिक रास्तों (Corridors) पर अवैध खनन (Illegal Mining) का असर पड़ रहा है, जिस पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।
जंगल में ही रुकेंगे हाथी: विभागीय तैयारी
विभागीय मंत्री सुदिव्य सोनू ने बताया कि हाथियों को बस्तियों में आने से रोकने के लिए जंगलों में उनके भोजन (विशेषकर बांस के पौधे) के प्रबंधन पर काम चल रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि:
बाहर से विशेषज्ञ टीमें बुलाई गई हैं जो स्थानीय लोगों को हाथियों से बचाव के लिए ट्रेंड कर रही हैं।
हाथियों के इलाज के लिए एक समर्पित चिकित्सालय (Hospital) बनाने की मांग पर भी विचार किया जा रहा है।

















