जंगल में लगी भीषण आग: महुआ फूलों के लिए लगाई गई आग से पर्यावरण को खतरा
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा/बोलबा : सिमडेगा जिले के बोलबा मुख्यालय से सटे घने जंगल, जिसे स्थानीय लोग ‘सरकारी भादरा’ के नाम से जानते हैं, आज सुबह अचानक आग की चपेट में आ गया। प्रारंभिक जांच में संदेह जताया जा रहा है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर जंगल में आग लगा दी। सुबह के समय जब ग्रामीणों की नजर उठती लपटों और घने धुएं पर पड़ी, तब तक आग काफी बड़े क्षेत्र में फैल चुकी थी।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया तो यह आसपास के गांवों और वन्यजीवों के लिए बड़ी तबाही का कारण बन सकती है। सूखी पत्तियों और तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
गांव के ही सुरेंद्र बड़ाइक के नेतृत्व में ग्रामीण आग बुझाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। वे टहनियों, मिट्टी और उपलब्ध पानी की मदद से आग को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि आग का दायरा बहुत बड़ा होने के कारण ग्रामीणों की अकेली कोशिशें पर्याप्त साबित नहीं हो पा रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बिना प्रशासनिक मदद, दमकल वाहनों और उचित उपकरणों के इतनी बड़ी आग पर नियंत्रण पाना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
ग्रामीणों ने इस घटना के पीछे एक बड़ा कारण भी बताया है। झारखंड के जंगलों में मार्च-अप्रैल के मौसम में महुआ वृक्षों से फूल गिरना शुरू हो जाते हैं। महुआ फूल ग्रामीणों की आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत हैं – लोग इन्हें चुनकर बाजार में बेचते हैं और इससे अच्छी कमाई करते हैं। कुछ शरारती तत्व सूखी पत्तियों और झाड़ियों को जलाकर जमीन साफ करते हैं, ताकि गिरे हुए महुआ फूल आसानी से इकट्ठा किए जा सकें। ग्रामीणों का मानना है कि इसी मकसद से आग लगाई गई है, जो पर्यावरण के लिए घातक साबित हो रही है।
यह आग न केवल हजारों पेड़-पौधों को नष्ट कर रही है, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी बड़ा खतरा बन गई है। कई छोटे-बड़े जीव-जंतु आग की लपटों में फंस सकते हैं, और जैव विविधता को गहरा नुकसान पहुंच रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने दमकल दल को तुरंत मौके पर भेजने, आग बुझाने के लिए उचित संसाधन उपलब्ध कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की है। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान और वैकल्पिक तरीकों (जैसे नेट से फूल इकट्ठा करना) को बढ़ावा देने की जरूरत बताई है।

















