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रेलवे का बड़ा कदम 180 किलोमीटर घंटे की रफ्तार से दौडती ट्रेन का सफल ट्रायल

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डीडीयू-गया-प्रधानखंता रेलखंड पर 180 किमी/घंटा की स्पीड ट्रायल आजपूर्व मध्य रेलवे (ECR) का बड़ा कदम: सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों की राह खुली

धनबाद/गया, 25 मार्च : भारतीय रेलवे आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। पूर्व मध्य रेलवे के डीडीयू यानी पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन – गया – प्रधानखंता रेलखंड पर 180 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति से स्पीड ट्रायल शुरू हो गया है। मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस विशेष ट्रायल ट्रेन डाउन दिशा में डीडीयू से गया होते हुए प्रधानखंता तक जाएगी और फिर अप दिशा में वापस लौटेगी।

यह ट्रायल रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के उन्नयन का हिस्सा है, जिसमें ट्रैक सुदृढ़ीकरण, उन्नत सिग्नलिंग और सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं। इससे पहले इस सेक्शन पर 160 किमी/घंटा का सफल ट्रायल हो चुका है। सफल होने पर यहां वंदे भारत जैसी सेमी हाई-स्पीड ट्रेनें नियमित रूप से 180 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगी, जिससे दिल्ली-कोलकाता और अन्य प्रमुख रूटों पर यात्रा समय में काफी कमी आएगी।

रेलवे की अपील – जनता से सहयोग जरूरी

रेल प्रशासन ने स्थानीय ग्रामीणों, पशु मालिकों और आम जनता के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। ट्रायल के दौरान निम्नलिखित सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करें:ट्रैक से पूरी दूरी बनाए रखें: 180 किमी/घंटा की आंधी जैसी रफ्तार में ट्रेन गुजरती है। ट्रैक के पास जाना या पार करना जानलेवा साबित हो सकता है।
मवेशी बांधकर रखें: पशुओं को रेल लाइन के आसपास बिल्कुल न छोड़ें।
फाटक नियमों का पालन: बंद समपार फाटकों या अनधिकृत जगहों से क्रॉसिंग बिल्कुल न करें।
पूरे दिन सतर्कता बरतें और रेलवे संपत्ति के आसपास लापरवाही न करें।

पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों ने कहा, “ट्रायल को सफल बनाने में स्थानीय लोगों का सहयोग अत्यंत जरूरी है। कोई भी उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

क्यों है यह ट्रायल महत्वपूर्ण?

इस रेलखंड पर ट्रैक और ब्रिजों को सेमी हाई-स्पीड के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
सफल ट्रायल के बाद दिल्ली-हावड़ा मुख्य रूट पर तेज और सुरक्षित परिचालन संभव होगा।
यह भारत के रेल आधुनिकीकरण का हिस्सा है, जिसमें कवच (Kavach) जैसी स्वदेशी सुरक्षा प्रणालियां भी शामिल हैं।

रेलवे ने सभी से अनुरोध किया है कि आज पूरे दिन इस रूट पर सावधानी बरतें और सूचना अपने आस-पास के लोगों तक पहुंचाएं।

सुरक्षा सर्वोपरि है।
ट्रायल की सफलता से न केवल यात्रियों को तेज रफ्तार मिलेगी, बल्कि रेल नेटवर्क की क्षमता भी बढ़ेगी।

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