बालू उठाव ठप: निर्माण कार्य प्रभावित, हजारों मजदूर हुए बेरोजगार
शंभू कुमार सिंह
सिमडेगा : जिले की नदियों में पर्याप्त मात्रा में बालू उपलब्ध होने के बावजूद बालू उठाव पूरी तरह ठप पड़ा है, जिससे निर्माण कार्यों पर गहरा असर पड़ा है। इस स्थिति का सबसे ज्यादा खामियाजा मजदूर वर्ग को भुगतना पड़ रहा है। हजारों श्रमिक बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि जिले में पहले से ही औद्योगिक इकाइयों का अभाव है और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र ही रोजगार का प्रमुख साधन रहा है।
जानकारी के अनुसार, पिछले लगभग आठ वर्षों से बालू उठाव में अनियमितता बनी हुई है, जिससे यह समस्या लगातार गहराती जा रही है। 13 जनवरी को उच्च न्यायालय द्वारा बालू घाटों के आवंटन पर लगी रोक हटा ली गई थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक जिले में बालू उठाव शुरू नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर कागजी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी हुई है।
बालू की कमी के चलते इसकी कीमतों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। पहले जहां 90–100 सीएफटी बालू करीब ₹1000 में उपलब्ध होता था, वहीं अब 60–70 सीएफटी बालू के लिए ₹3500 से अधिक वसूले जा रहे हैं। इससे निर्माण कार्य महंगे हो गए हैं और आम लोगों के साथ-साथ ठेकेदारों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
अधिकरण (NGT) के नियमों के तहत बालू खनन पर रोक लग जाती है, जो 15 अक्टूबर तक लागू रहती है। ऐसे में यदि जल्द ही बालू उठाव शुरू नहीं किया गया, तो इस वर्ष भी जिले में बालू संकट और गहरा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, बालू उठाव से जुड़े लगभग 500 ट्रैक्टरों के माध्यम से करीब 2500 मजदूरों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। वहीं मजदूर नेता राजेश सिंह का कहना है कि कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में करीब 20 हजार मजदूर कार्यरत हैं, जिनकी आजीविका इस संकट से प्रभावित हो रही है। इसका असर शहर के व्यवसाय पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
जिले में छह बालू घाटों में से केवल एक की कागजी प्रक्रिया पूरी हो पाई है, जो अब भी लंबित है। संबंधित ठेकेदार द्वारा पर्यावरण स्वीकृति के लिए आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी है।


















