Jharkhand Electricity Department Scam: Passion for Luxury Watches Uncovers 56.5 Crore Embezzlement;

झारखंड बिजली विभाग घोटाला: लग्जरी घड़ियों के शौक ने खोला 56.5 करोड़ के गबन का राज, CID ने फ्रीज किया कंपनी का खाता

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झारखंड बिजली विभाग घोटाला: लग्जरी घड़ियों के शौक ने खोला 56.5 करोड़ के गबन का राज, CID ने फ्रीज किया कंपनी का खाता

झारखंड बिजली विभाग घोटाला: लग्जरी घड़ियों के शौक ने खोला 56.5 करोड़ के गबन का राज, CID ने फ्रीज किया कंपनी का खाता

Jharkhand Electricity Department Scam: Passion for Luxury Watches Uncovers 56.5 Crore Embezzlement;

रांची:  झारखंड बिजली विभाग के  झारखंड राज्य विद्युत कर्मचारी मास्टर ट्रस्ट में हुए 56.5 करोड़ रुपये के महाघोटाले में सीआईडी (CID) ने एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने रसूखदारों की नींद उड़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जांच में सामने आया है कि कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई के पैसे से न केवल हेराफेरी की गई, बल्कि इस राशि से  राडो (Rado) और  ओमेगा (Omega)  जैसी लग्जरी घड़ियों का शौक भी पूरा किया गया।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीआईडी की गहन जांच में पता चला है कि मास्टर ट्रस्ट के खाते से 56.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि अवैध रूप से निजी बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इस काले धन को सफेद करने और जांच से बचने के लिए  लेयरिंग’ (Layering) का सहारा लिया गया। यानी पैसे को सीधे निकालने के बजाय दर्जनों फर्जी फर्मों के खातों में घुमाया गया।

फर्जी फर्मों का मकड़जाल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जांच एजेंसी के अनुसार, ट्रस्ट का पैसा सबसे पहले इन संदिग्ध फर्मों के खातों में पहुंचा:
हरेश ट्रेडर्स
अशोक इलेक्ट्रॉनिक्स
राजीव टेक्सटाइल
आदर्श डीलर्स

स्वॉच ग्रुप के खाते में पहुंचे 20 लाख रुपये 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार घोटाले की कड़ियां जोड़ते हुए सीआईडी तब हैरान रह गई, जब एक ट्रांजेक्शन दिल्ली स्थित  मेसर्स स्वॉच ग्रुप के खाते में मिला। वेस्ट पंजाबी बाग स्थित सिटी बैंक की शाखा में मौजूद इस कंपनी के खाते में  20 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
बता दें कि स्वॉच ग्रुप दुनिया की मशहूर लग्जरी घड़ी कंपनियों (राडो, टीस्सॉट, ओमेगा, लॉगीनेस) का डिस्ट्रीब्यूशन और रिसेल देखती है। सीआईडी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इस बैंक खाते को  फ्रीज कर दिया है।

> जांच का मुख्य फोकस अब इस बात पर है कि बिजली विभाग के फंड से इन महंगी घड़ियों का भुगतान किसके लिए किया गया था। क्या ये घड़ियाँ किसी रसूखदार को तोहफे में दी गई थीं या गबन करने वालों ने खुद के शौक पूरे किए?

सिस्टम पर खड़े हुए गंभीर सवाल

जाहिर है यह घोटाला झारखंड में वित्तीय पारदर्शिता और सरकारी फंड की निगरानी प्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। 56.5 करोड़ जैसी बड़ी राशि का ट्रस्ट के खाते से बाहर जाना बिना किसी उच्चाधिकारी की मिलीभगत के संभव नहीं लगता।

आगामी कार्रवाई:

 मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सीआईडी अब उन लोगों की सूची तैयार कर रही है, जिनके पास पिछले कुछ समय में ये लग्जरी घड़ियां पहुंची हैं। आने वाले दिनों में बिजली विभाग के कई बड़े अधिकारियों और बिचौलियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

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