A businessman was jailed for 57 days after mistaking spices for drugs; the High Court granted him justice after 16 years.

मसाले को ड्रग्स समझ बैठी मशीन, 57 दिन जेल में रहा कारोबारी; 16 साल बाद हाई कोर्ट ने दिलाया इंसाफ

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A businessman was jailed for 57 days after mistaking spices for drugs; the High Court granted him justice after 16 years.
A businessman was jailed for 57 days after mistaking spices for drugs; the High Court granted him justice after 16 years.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक कारोबारी को गलत तरीके से जेल भेजे जाने के मामले में राज्य सरकार को 10 लाख रुपये मुआवज़ा देने का निर्देश दिया है। कारोबारी को एयरपोर्ट पर जांच के दौरान एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर (ETD) मशीन द्वारा अमचूर और गरम मसाला को ड्रग्स बताए जाने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले में कारोबारी को 57 दिन जेल में बिताने पड़े और करीब 16 साल बाद उसे न्याय मिला।

मामला कारोबारी अजय सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी गिरफ्तारी और लंबे समय तक जेल में रखे जाने को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि जिन मसालों को ड्रग्स समझा गया था, उनमें किसी भी प्रकार का प्रतिबंधित पदार्थ नहीं मिला।

कोर्ट के आदेश के अनुसार, अजय सिंह 7 मई 2010 को भोपाल से दिल्ली होते हुए मलेशिया जा रहे थे। इसी दौरान भोपाल एयरपोर्ट पर जांच के समय ETD मशीन ने उनके सामान में रखे ब्रांडेड अमचूर और गरम मसाला के पैकेट में कथित तौर पर हेरोइन और MDEA के अंश होने का संकेत दिया। इसके बाद Central Industrial Security Force (CISF) के जवानों ने उन्हें हिरासत में ले लिया और Madhya Pradesh के गांधी नगर थाना में NDPS एक्ट की धारा 8/21 के तहत FIR दर्ज की गई।

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि जब्त नमूनों की जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई। MDEA की जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण नमूनों को 10 दिन बाद वापस भेज दिया गया। बाद में जांच के लिए नमूनों को हैदराबाद स्थित केंद्रीय फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया।

30 जून 2010 को आई फोरेंसिक रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया कि जब्त नमूनों में कोई भी प्रतिबंधित पदार्थ मौजूद नहीं था। इसके बाद अजय सिंह को 57 दिन न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 2 जुलाई 2010 को निजी मुचलके पर रिहा किया गया। बाद में पुलिस ने स्पेशल NDPS कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिसे 10 दिसंबर 2010 को स्वीकार कर लिया गया।

इसके बाद अजय सिंह ने हाई कोर्ट में 10 करोड़ रुपये मुआवज़े की मांग करते हुए याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस Deepak Khot ने राज्य सरकार को 10 लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि राज्य उन एजेंसियों की कार्रवाई के लिए परोक्ष रूप से जिम्मेदार है, जिनकी वजह से याचिकाकर्ता को 57 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। कोर्ट ने माना कि यह कार्रवाई गलत आधार पर की गई थी और इससे याचिकाकर्ता के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फोरेंसिक व्यवस्था मजबूत करने के भी निर्देश दिए हैं। अदालत ने मुख्य सचिव को एक महीने के भीतर सभी क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं का निरीक्षण कर आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

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