फलता विधानसभा सीट पर बीजेपी की बड़ी जीत, दोबारा मतदान के बाद टीएमसी को झटका
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को करीब एक लाख वोटों के भारी अंतर से हराकर सीट अपने नाम कर ली। यह सीट पहले टीएमसी के कब्जे में थी और पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती थी।
फलता विधानसभा क्षेत्र टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ऐसे में इस सीट पर बीजेपी की जीत को राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है।
पहली वोटिंग रद्द, फिर कराया गया चुनाव
29 अप्रैल को इस सीट पर पहली बार मतदान हुआ था। मतदान के दौरान ईवीएम से छेड़छाड़, बूथ कब्जाने और मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने पूरे इलाके की वोटिंग रद्द कर दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया था। दोबारा हुई वोटिंग के बाद जब मतगणना हुई तो बीजेपी ने रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल कर ली। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह परिणाम पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बढ़ती पकड़ का संकेत माना जा रहा है।
ममता बनर्जी ने लगाए गंभीर आरोप
नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख Mamata Banerjee ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटों की फिर से चोरी की गई और केंद्रीय बलों के जवान बीजेपी के एजेंट बनकर मतगणना केंद्र के अंदर मौजूद थे। ममता बनर्जी ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई और उनकी पार्टी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएगी।
शुभेंदु अधिकारी का टीएमसी पर हमला
वहीं बीजेपी नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari ने इस जीत को जनता का फैसला बताया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब टीएमसी की राजनीति से परेशान हो चुकी है और बीजेपी के पक्ष में माहौल बन रहा है।।उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी ने चुनाव के दौरान लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की, लेकिन जनता ने जवाब दे दिया।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
फलता सीट पर बीजेपी की जीत ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। आने वाले समय में इस नतीजे का असर राज्य की राजनीतिक रणनीतियों पर भी देखने को मिल सकता है।
















