स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार को लेकर स्वास्थ्य मंत्री का सख्त रुख, 15 दिनों का अल्टीमेटम

रांची : राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर ठोस सुधार सुनिश्चित करने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और लापरवाही पाए जाने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह की उपस्थिति में आयोजित लगभग तीन घंटे की मैराथन समीक्षा बैठक में राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जनों, डीएस एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में अस्पतालों की कार्यप्रणाली, दवा आपूर्ति, एंबुलेंस सेवा, मानव संसाधन एवं आगामी मानसून के लिए तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
15 दिनों में सुधार नहीं तो कार्रवाई तय
स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि सभी जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अगले 15 दिनों में स्पष्ट रूप से बेहतर दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही, उदासीनता या ढिलाई अब स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जहां भी कार्य में बाधा आती है, वहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों से समन्वय कर समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही अधिकारियों से पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की अपील की गई।
हर सदर अस्पताल को मिलेंगी अतिरिक्त एंबुलेंस
स्वास्थ्य मंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य के सभी सदर एवं रेफरल अस्पतालों को चार-चार अतिरिक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाएंगी। यह व्यवस्था 108 एंबुलेंस सेवा से अलग होगी, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर सुविधा मिल सके। इसके अलावा एंबुलेंस सेवा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अस्पतालों को तकनीकी संसाधन और टैबलेट भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि सूचना मिलते ही तत्काल सेवा सुनिश्चित की जा सके।
मानसून को लेकर विशेष तैयारी के निर्देश
बैठक में मंत्री ने आगामी मानसून को देखते हुए डेंगू, मलेरिया, वायरल फीवर सहित मौसमी बीमारियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने सभी अस्पतालों में दवाओं, बेड, चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सिविल सर्जनों को अस्पताल परिसर में रहने का आदेश
स्वास्थ्य मंत्री ने सभी सिविल सर्जनों को सदर अस्पताल परिसर में ही निवास करने का निर्देश दिया और कहा कि आपात स्थिति में उनकी तत्काल उपलब्धता अनिवार्य होगी। बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर निलंबन सहित कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
अधिकारियों की जवाबदेही तय
एनएचएम के प्रबंध निदेशक को निर्देश देते हुए मंत्री ने कहा कि सिविल सर्जनों को पर्याप्त प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं ताकि वे अपने स्तर पर त्वरित निर्णय ले सकें। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित सिविल सर्जन की होगी।
भुगतान और अन्य मुद्दों पर भी चर्चा
बैठक में कर्मचारियों के लंबित भुगतान, ट्रेजरी संबंधी समस्याओं और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर भी चर्चा की गई। मंत्री ने आश्वासन दिया कि तकनीकी कारणों से रुके भुगतान शीघ्र जारी किए जाएंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार सर्वोच्च प्राथमिकता
अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि छोटी-छोटी समस्याओं का समय पर समाधान ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की कुंजी है। बैठक में राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जन, डीएस, एनएचएम के वरिष्ठ अधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
















