नेता गायब! जनता मजबूर: ग्रामीणों ने चंदा और श्रमदान से बनाई 600 मीटर सड़क

शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा: सदर प्रखंड की गरजा पंचायत में विकास के दावों की पोल उस समय खुल गई, जब वर्षों से जर्जर सड़क से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का इंतजार छोड़ खुद ही सड़क बनाने का फैसला कर लिया। ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाया और श्रमदान कर करीब 600 मीटर कच्ची सड़क तैयार कर दी।
डांड़टोली से सोगडा जाने वाले पालामड़ा नदी के समीप स्थित यह सड़क गरजा से सोगडा होते हुए पाकरटांड प्रखंड को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। लंबे समय से सड़क बदहाल होने के कारण स्कूली बच्चों, किसानों और मरीजों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती थी, जिससे आवागमन लगभग ठप हो जाता था।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार लोगों ने स्वयं आगे आकर चंदा एकत्र किया और श्रमदान के जरिए सड़क तैयार कर दी। इससे अब ग्रामीणों को आने-जाने में पहले की तुलना में काफी राहत मिली है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह इलाका सिमडेगा विधायक के आवास से महज ढाई किलोमीटर की दूरी पर है, इसके बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में कोई प्रभावी पहल नहीं की गई। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के मामले में जनता को अपने भरोसे छोड़ दिया जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि श्रमदान से बनी यह सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी बड़ा सवाल है। अब लोगों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी है कि इस महत्वपूर्ण सड़क का स्थायी निर्माण कब तक कराया जाता है।
















