पिछड़ी जाति संघर्ष समिति ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, OBC आरक्षण और अधिकारों की उठाई मांग

शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा: जिला पिछड़ी जाति संघर्ष समिति, सिमडेगा ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल में रहने वाले अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय के अधिकारों, आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों को उठाया। समिति ने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में पिछड़ी जाति के लोगों को नौकरी, राजनीति और पेसा कानून के तहत पर्याप्त अधिकार नहीं मिल रहे हैं।
समिति का कहना है कि सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, खूंटी और रांची समेत कई जिलों में पिछड़ी जाति की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि अधिकांश OBC आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जहां गरीबी और अशिक्षा की समस्या गंभीर है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि अविभाजित बिहार में पिछड़ी जाति को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता था, लेकिन झारखंड गठन के बाद कई जिलों में यह व्यवस्था प्रभावी नहीं रही, जिससे समुदाय के लोगों के रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल असर पड़ा।
समिति ने पेसा कानून, 1996 और प्रस्तावित पेसा कानून, 2025 का हवाला देते हुए कहा कि पारंपरिक ग्राम व्यवस्था में पिछड़ी जाति की भागीदारी सीमित कर दी गई है, जिससे उनके सामाजिक और प्रशासनिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा आगामी जनगणना में OBC कॉलम शामिल नहीं किए जाने पर भी समिति ने आपत्ति जताई और कहा कि इससे पिछड़ी जाति की वास्तविक आबादी और सामाजिक स्थिति का सही आकलन नहीं हो सकेगा।
समिति की प्रमुख मांगें
* राज्य के सभी जिलों में पिछड़ी जाति को 27 प्रतिशत या आबादी के अनुपात में आरक्षण दिया जाए।
* राजनीतिक पदों पर भी आबादी के आधार पर आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
* प्रस्तावित पेसा कानून 2025 में पिछड़ी जाति को ग्राम स्तर पर अधिकार दिए जाएं।
* आगामी जनगणना में OBC कॉलम शामिल किया जाए।
* परिसीमन के दौरान आबादी के आधार पर आरक्षण लागू किया जाए।
समिति ने राज्यपाल से इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है। ज्ञापन पर मुख्य संरक्षक जगदीश साहू, अध्यक्ष रामजी यादव, महासचिव बजरंग प्रसाद समेत अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।
















