IRS निशा उरांव के नेतृत्व में धर्मांतरण पर ग्राम सभा का ‘अंतिम प्रहार’: लोहरदगा के हाटी गाँव में ‘सूचना पट्टी’ लगाकर चंगाई सभाओं पर लगाई पूर्ण रोक
लोहरदगा में IRS निशा उराँव के नेतृत्व में हाटी गाँव ने ‘सूचना पट्टी’ लगाकर धर्मांतरण और चंगाई सभा पर लगाई स्थायी रोक। जानें क्या है ग्राम सभा का संवैधानिक अधिकार और सरना-सनातन एकता की पूरी खबर।

लोहरदगा: झारखंड में अपनी संस्कृति, धर्म और परंपराओं के संरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक पहल सामने आई है। लोहरदगा जिले में IRS निशा उराँव के नेतृत्व में हाटी ग्राम सभा ने धर्मांतरण की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए एक अनूठा और साहसिक निर्णय लिया है। ग्राम सभा ने गाँव के प्रवेश द्वार पर एक ‘सूचना पट्टी’ (Notice Board) लगाकर ‘चंगाई सभा’ (Healing Meetings) और धर्मांतरण के उद्देश्यों से आने वाले लोगों पर स्थायी रूप से रोक लगा दी है।
गाँव का स्वाभिमान है ‘सूचना पट्टी

इस पूरी जानकारी को निशा उराँव ने अपने सोशल मीडिया में खुद शेयर किया है । उन्होंने पोस्ट कर जानकारी दी है की हाटी गाँव की इस पहल को केवल एक सरकारी आदेश के रूप में नहीं, बल्कि गाँव के स्वाभिमान और अपनी जड़ों को बचाने के ‘संकल्प’ के रूप में देखा जा रहा है। सूचना पट्टी पर स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि गाँव की सीमा के भीतर पादरी, पास्टर या बाहरी व्यक्ति धर्मांतरण के एजेंडे के साथ प्रवेश न करें। ग्रामीणों का कहना है कि यह उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं की रक्षा का एक सीधा प्रयास है।
संविधान और पेसा कानून का आधार
ग्राम सभा के इस कड़े कदम को कानूनी समर्थन भी प्राप्त है। स्थानीय जानकारों और कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व के फैसलों में ग्राम सभाओं द्वारा लिए गए ऐसे निर्णयों को संवैधानिक मान्यता दी गई है। संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) और पेसा कानून (PESA Act) के तहत ग्राम सभा को अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। इसी अधिकार का उपयोग करते हुए हाटी ग्राम सभा ने धर्मांतरण विरोधी यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
सरना-सनातन एकता’ बनी मिसाल
इस पूरी मुहिम की सबसे बड़ी विशेषता ‘सरना-सनातन एकता’ है। गाँव के सनातनी परिवारों ने सरना समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस निर्णय को लागू किया है। ग्रामीणों का मानना है कि यह एकता उन विघटनकारी शक्तियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। एकता का यह सुंदर उदाहरण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
पूरे झारखंड में गूंजेगी यह मुहिम
हाटी गाँव की यह पहल अब एक मॉडल के रूप में उभर रही है। परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक समरसता को बनाए रखने के लिए, आने वाले समय में झारखंड के अन्य गाँवों में भी इसी तरह की ‘सूचना पट्टियाँ’ लगाने की योजना बनाई जा रही है।
यह पहल दर्शाती है कि जब ग्राम सभाएँ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती हैं, तो वे अपनी संस्कृति और पहचान की रक्षा करने में कितनी सक्षम होती हैं।
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