Padma Vibhushan-honoured Pandvani singer Teejan Bai passes away; an irreparable loss to the world of folk art.

पद्म विभूषण से सम्मानित पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, लोककला जगत को अपूरणीय क्षति

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Padma Vibhushan-honoured Pandvani singer Teejan Bai passes away; an irreparable loss to the world of folk art.
Padma Vibhushan-honoured Pandvani singer Teejan Bai passes away; an irreparable loss to the world of folk art.

रायपुर: देश की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद रविवार तड़के निधन हो गया। वह पिछले कई सप्ताह से रायपुर स्थित अस्पताल में भर्ती थीं। अस्पताल प्रशासन ने उनके निधन की पुष्टि की है। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, तीजन बाई पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार थीं और उनका इलाज चल रहा था। रविवार तड़के करीब 3:15 बजे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।

पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान

तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी दमदार आवाज, अनूठी अभिनय शैली और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से मंच पर जीवंत किया। उनकी कला ने भारतीय लोक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया।

कई प्रतिष्ठित सम्मानों से हुईं सम्मानित

तीजन बाई को भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान के लिए कई राष्ट्रीय सम्मान मिले। उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार भी प्राप्त हुए।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक

Narendra Modi ने तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन से उन्हें अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने अपनी भव्य प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की इस लोककला को दुनिया भर में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका निधन कला एवं संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों और उनके प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए “ओम शांति” कहा।

सांस्कृतिक जगत में शोक

तीजन बाई के निधन की खबर के बाद कलाकारों, साहित्यकारों, जनप्रतिनिधियों और उनके प्रशंसकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्हें भारतीय लोककला की ऐसी विरासत के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और समर्पण से पंडवानी जैसी पारंपरिक कला को विश्व स्तर पर सम्मान दिलाया। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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