वैज्ञानिक डॉ. सिद्धार्थ जिनेवा रवाना, ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर विश्वस्तरीय शोध में लेंगे हिस्सा

सिमडेगा: झारखंड के सिमडेगा जिले के कोनबेगी निवासी वैज्ञानिक डॉ. सिद्धार्थ कुमार प्रसाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के साथ ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्यों को समझने के महाप्रयास में शामिल होने के लिए स्विट्जरलैंड के जिनेवा रवाना हुए हैं। वे यूरोपियन ऑर्गेनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (CERN) में चल रहे विश्व के सबसे बड़े वैज्ञानिक प्रयोग में भाग लेंगे, जहां बिग बैंग सिद्धांत के आधार पर ब्रह्मांड की उत्पत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण शोध किए जा रहे हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!डॉ. सिद्धार्थ को उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित ब्रेकथ्रू सम्मान (Breakthrough Prize) प्राप्त हो चुका है। यह सम्मान विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल करने वाले वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदान किया जाता है।

वर्तमान में डॉ. सिद्धार्थ बोस इंस्टीट्यूट, कोलकाता में स्थायी वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सिमडेगा के संत अन्ना स्कूल से हुई, जबकि माध्यमिक शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, गुमला से पूरी की। इसके बाद उन्होंने रांची विश्वविद्यालय से बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की तथा वेरिएबल एनर्जी साइक्लोट्रॉन सेंटर (VECC), कोलकाता से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने अमेरिका के वेन स्टेट यूनिवर्सिटी, मिशीगन से भी उच्च शिक्षा ग्रहण की है।
डॉ. सिद्धार्थ के पिता कृष्ण प्रसाद कृषि से जुड़े रहे हैं और लंबे समय तक कोनबेगी पंचायत के मुखिया के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सिमडेगा जैसे छोटे जिले से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान के क्षेत्र में पहचान बनाने वाले डॉ. सिद्धार्थ कुमार प्रसाद आज झारखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। जिनेवा में उनका यह शोध अभियान ब्रह्मांड की उत्पत्ति से जुड़े कई नए वैज्ञानिक तथ्यों को उजागर करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
















