सारंडा की बदहाली पर बाबूलाल मरांडी का हमला, DMFT फंड में गड़बड़ी का लगाया आरोप

रांची: पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र के दौरे से लौटे झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध सारंडा के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका दावा है कि क्षेत्र से बड़े पैमाने पर लौह अयस्क का खनन होने के बावजूद स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
मरांडी ने कहा कि सारंडा के कई गांवों में आज भी स्वच्छ पेयजल, बिजली और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर क्षेत्र के लोगों को विकास का लाभ आखिर क्यों नहीं मिल पा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए वर्ष 2015 में यह व्यवस्था लागू की थी। उनके अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम जिले को भी विकास कार्यों के लिए बड़ी राशि उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन उसका लाभ जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता।

मरांडी ने आरोप लगाया कि DMFT की राशि का सही तरीके से उपयोग नहीं हुआ और विकास कार्यों की बजाय अन्य मदों में खर्च किया गया। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित गांवों की स्थिति देखकर यह स्पष्ट होता है कि योजनाओं का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पाया है।
राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार राजस्व वृद्धि और विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन धरातल पर तस्वीर अलग नजर आती है। उन्होंने अवैध खनिज परिवहन और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठाए।
इसके साथ ही मरांडी ने दावा किया कि वर्ष 2023 के बाद नई विकास योजनाओं की जानकारी संबंधित पोर्टल पर नियमित रूप से अपलोड नहीं की गई है। उन्होंने इसे पारदर्शिता की कमी बताते हुए सरकार से DMFT फंड की प्राप्त राशि और उसके खर्च का विस्तृत श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास का वास्तविक लाभ मिलना चाहिए और सरकार को इस मुद्दे पर जनता के सामने पूरी जानकारी रखनी चाहिए।

















