गोबर गैस से बदली गांव की तस्वीर: सिमडेगा में धुएँ से मिली मुक्ति, जैविक खेती को मिला बढ़ावा

शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा: सिमडेगा जिला प्रशासन की पहल पर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत बोलबा और ठेठईटांगर प्रखंड में स्थापित सामुदायिक गोबर गैस संयंत्र ग्रामीण विकास की नई मिसाल बनकर सामने आए हैं। इस पहल ने ग्रामीणों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ महिलाओं के जीवन को आसान बनाया है और पर्यावरण संरक्षण व जैविक खेती को भी नई दिशा दी है।
बोलबा प्रखंड की समसेरा पंचायत के बोलबा मुखिया टोली में 30 घनमीटर क्षमता का सामुदायिक गोबर गैस संयंत्र स्थापित किया गया है। गांव के 19 परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। सभी परिवारों को प्रतिदिन तीनों समय भोजन पकाने के लिए पर्याप्त मात्रा में गोबर गैस मिल रही है।
पहले गांव की महिलाओं को खाना बनाने के लिए जंगलों से जलावन लकड़ी लानी पड़ती थी। इससे समय और श्रम की बर्बादी होने के साथ-साथ धुएँ के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी होती थीं। अब गोबर गैस के उपयोग से रसोई धुएँ से मुक्त हो गई है। महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और जलावन के लिए पेड़ों की कटाई में भी कमी आई है।
गोबर गैस संयंत्र से निकलने वाली बायो-स्लरी किसानों के लिए जैविक खाद का काम कर रही है। किसान इसका उपयोग खेतों में कर रहे हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घट रही है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ रही है। इससे प्राकृतिक एवं जैविक खेती को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

संयंत्र के संचालन के लिए ग्रामीण प्रतिदिन गोबर उपलब्ध कराते हैं। ग्रामसभा के निर्णय के अनुसार प्रत्येक परिवार से रखरखाव के लिए 30 रुपये मासिक योगदान लिया जाता है। वहीं, संयंत्र के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी कमल, सीता और जीवन आजीविका स्वयं सहायता समूहों को सौंपी गई है। निर्माण एजेंसी भी अगले तीन वर्षों तक तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी।
ठेठईटांगर प्रखंड में भी इसी मॉडल पर सामुदायिक गोबर गैस संयंत्र संचालित किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन का मानना है कि यह पहल “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को साकार करते हुए ग्रामीण आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही है।
जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस मॉडल का विस्तार जिले की अन्य पंचायतों में भी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार स्वच्छ ईंधन, जैविक खेती और बेहतर जीवन स्तर का लाभ प्राप्त कर सकें।















