पेपर लीकआखिर कैसे रुकेगा ? क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा काफी है ? या व्यवस्था में सुधार की जरुरत है ।

नवीन कुमार
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से देश के छात्रों की समस्या का हल निकल जायेगा यह बड़ा सवाल है। क्योकि झारखंड ,गुजरात ,मध्यप्रदेश हो या देश का कोई भी राज्य पेपर लीक से अछूता नहीं है। झारखण्ड में JPSC में हुए घोटाले की जाँच फ़िलहाल CID कर रही है। तो पिछले 25 वर्षो में यहाँ आयोजित लगभग एक दर्जन परीक्षा जाँच के घेरे में है । कई जाँच तो ऐसे होते है जो वर्षो की खोज के बाद भी बेनतीजा समाप्त हो जाते है . JSSC CGLकी जाँच हुई CID ने जाँच की लेकिन नतीजा सिफर रहा। केंद्र में धर्मेंद्र प्रधान , झारखण्ड में पूर्व JSSC चेयरमैन नीरज सिन्हा का इस्तीफा , या अभी JPSC अध्यक्ष एल खायंगते का इस्तीफा . क्या इससे पेपर लीक का मामला सुलझ जायेगा ? नहीं कतई नहीं , दरअसल पेपर लीक को रोकने के लिए व्यवस्था में सुधार की जरुरत है
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: छात्रों की जीत, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की अब भी जरूरत
वर्ष 2024 में NEET-UG पेपर लीक और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की थी। समिति ने अक्टूबर 2024 में अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए 101 सिफारिशें दीं।
यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है तो NEET जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है आखिर क्या है मसौदा आइए समझते हैं।
पेपर लीक की सबसे बड़ी कड़ी कैसे खत्म होगी ?
अभी तक अधिकांश परीक्षाओं में प्रश्नपत्र पहले से प्रिंट होकर विभिन्न राज्यों और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाते हैं। इसी दौरान कई मामलों में प्रश्नपत्र लीक होने या उसके साथ छेड़छाड़ की बातें सामने आती रही है ।
राधाकृष्णन समिति ने इस पूरी प्रक्रिया को बदलने का सुझाव दिया है।
समिति के अनुसार प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से केवल 30 से 60 मिनट पहले एन्क्रिप्टेड डिजिटल माध्यम से सीधे परीक्षा केंद्रों पर भेजा जाएगा। इसके बाद प्रश्नपत्र की प्रिंटिंग उसी केंद्र पर होगी। इससे प्रश्नपत्र के परिवहन की आवश्यकता लगभग समाप्त हो जाएगी और रास्ते में पेपर लीक होने की संभावना भी काफी कम हो जाएगी।
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हाइब्रिड परीक्षा मॉडल क्या है?
समिति ने इसे हाइब्रिड परीक्षा मॉडल नाम दिया है।
इस मॉडल में परीक्षा अभी भी ऑफलाइन (पेन-पेपर) हो सकती है, लेकिन प्रश्नपत्र का वितरण पूरी तरह डिजिटल और एन्क्रिप्टेड होगा। यानी प्रश्नपत्र इंटरनेट के माध्यम से सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्र तक पहुंचेगा, जबकि अभ्यर्थी उत्तर OMR शीट पर ही देंगे।
इससे कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करने की कठिनाइयों से भी बचा जा सकेगा और पेपर सुरक्षा भी बढ़ेगी।
सरकारी परीक्षा केंद्रों को मिलेगी प्राथमिकता
समिति ने देशभर में लगभग 1,000 सुरक्षित परीक्षा केंद्र विकसित करने की सिफारिश की है।
इन केंद्रों का संचालन केंद्र या राज्य सरकार के संस्थानों के माध्यम से किया जाएगा। आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम, निगरानी व्यवस्था और साइबर सुरक्षा के जरिए निजी परीक्षा केंद्रों पर निर्भरता कम करने की योजना है।
NTA में करने होंगे बड़े बदलाव
रिपोर्ट में केवल परीक्षा प्रक्रिया ही नहीं बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के ढांचे में भी व्यापक सुधार का सुझाव दिया गया है।
समिति ने कहा है कि एजेंसी में डेटा सुरक्षा मजबूत की जाए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जाए, परीक्षार्थियों की पूर्ण बायोमेट्रिक पहचान सुनिश्चित की जाए और सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर हेरफेर की संभावना कम हो सके।
चुनाव जैसी होगी परीक्षा व्यवस्था
रिपोर्ट में राष्ट्रीय परीक्षाओं के संचालन में राज्यों की प्रशासनिक मशीनरी को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है।
समिति का मानना है कि जिस तरह लोकसभा और विधानसभा चुनावों में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के साथ चुनाव कराती हैं, उसी तरह राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं का संचालन भी किया जाना चाहिए।
क्यों बनी थी यह समिति?
NEET-UG 2024 में पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों के बाद 22 जून 2024 को शिक्षा मंत्रालय ने डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति ने 21 अक्टूबर 2024 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपते हुए परीक्षा सुधार के लिए 101 सिफारिशें दीं।
गौरतलब है की यदि समिति की प्रमुख सिफारिशें पूरी तरह लागू होती हैं तो शायद आज स्थिति उलट होती । ना तो पेपर लीक होता ! ना ही निराशा के बीच छात्रों को आत्महत्या करने की नौबत आती । ना ही जंतर मंतर में धरना प्रदर्शन होता और ना ही देश विरोधी ताकतों को इसे हवा देने का मौका मिलता . और अंत में ना ही धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ता ।

















