Will the Jantar Mantar movement now come to an end, or will it take on a new form?

प्रधान का इस्तीफा: क्या जंतर-मंतर का आंदोलन अब खत्म होगा या नया रूप लेगा?

Will the Jantar Mantar movement now come to an end, or will it take on a new form?

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By Navin Kumar 

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने NEET पेपर लीक विवाद को एक नए मोड़ पर ला दिया है। महीनों से जंतर-मंतर पर चला छात्र आंदोलन अब निर्णायक पड़ाव पर है। शिक्षा मंत्री की कुर्सी खाली हुई, लेकिन सवाल उठता है — क्या इससे आंदोलन थम जाएगा? क्या हजारों युवा घर लौट आएंगे? पुलिस ने भी शांति की अपील करते हुए घर वापसी का आह्वान किया है।

जीत का स्वाद, लेकिन अधूरी माँगें

प्रधान का इस्तीफा छात्रों की लगातार लड़ाई की जीत है। उन्होंने पद छोड़ दिया। कई युवा इसे अपनी आवाज की सफलता मान रहे हैं। लेकिन आंदोलन की आग सिर्फ एक व्यक्ति के इस्तीफे से बुझने वाली नहीं थी।CJP और छात्रों की मुख्य माँगें अभी बाकी हैं — NTA का आमूलचूल सुधार, पेपर लीक के असली गुनहगारों पर सख्त कार्रवाई, प्रभावित छात्रों को मुआवजा और पुलिस लाठीचार्ज पर जवाबदेही। अगर सरकार इन पर तुरंत और ठोस कदम उठाती है तो आंदोलन कमजोर पड़ सकता है। लेकिन अगर सिर्फ इस्तीफे को ही समाधान मान लिया गया, तो गुस्सा और भड़क सकता है।घर लौटेंगे या डटे रहेंगे?दो रास्ते साफ दिख रहे हैं:
कुछ छात्र जरूर लौटेंगे

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पढ़ाई का नुकसान हो रहा है तो दूसरी ओर परिवार का दबाव है।बारिश और थकान — ये सब आम छात्रों को घर खींच रहे हैं। प्रधान के इस्तीफे के बाद कई युवा राहत की सांस ले रहे हैं। पुलिस का घर लौटने का आह्वान भी कुछ हद तक असर करेगा। अगर सरकार मुआवजा के अलावे अगले कदम की घोषणा करती है तो जंतर-मंतर की भीड़ छंट सकती है।लेकिन आंदोलन अभी पूरी तरह खत्म नहीं होगा

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: छात्रों की जीत, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की अब भी जरूरत

CJP और कोर आंदोलनकारी साफ कह रहे हैं — “इस्तीफा शुरुआत है, सिस्टम बदलना बाकी है।” आंदोलन अब NEET से आगे निकल चुका है। ये युवा वर्ग की गहरी नाराजगी, बेरोजगारी और परीक्षा व्यवस्था की खामियों का प्रतीक बन गया है। ऐसे में पूरा आंदोलन एक झटके में खत्म होना आसान नहीं।पुलिस का घर लौटने का आह्वान कानून-व्यवस्था के लिए सही है। लंबे आंदोलन में स्थिति बिगड़ने का खतरा हमेशा रहता है। लेकिन आंदोलनकारियों को भी लगता है कि ये दबाव बनाने की कोशिश है। सच्चाई यह है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र की ताकत है, पर अनावश्यक अड़ियल रवैया या हिंसा किसी के काम नहीं आती।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: छात्रों की जीत, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की अब भी जरूरत

कहा जा सकता है कि प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन पूरी तरह खत्म तो नहीं होगा, लेकिन उसका रूप जरूर बदलेगा। भीड़ कम हो सकती है, माहौल शांत नजर आ सकता है, लेकिन माँगें और दबाव जारी रहेंगे।सरकार को अब सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि साहसिक पहल करनी चाहिए — NTA को नया रूप दें, छात्रों का खोया भरोसा लौटाएँ।
वहीं आंदोलनकारियों को समझना चाहिए कि आंदोलन साधन है, साध्य नहीं। अब बातचीत और निर्माण का समय है।

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कुल मिलाकर जंतर-मंतर अगले कुछ दिनों में कुछ हद तक शांत हो सकता है, लेकिन युवा भारत की आवाज दबने वाली नहीं है। असली जीत तब होगी जब पेपर लीक जैसी घटनाएँ इतिहास बन जाएँ और हर छात्र का भविष्य सुरक्षित महसूस हो।आंदोलन का नया अध्याय शुरू हो चुका है। देखना यह है कि यह सकारात्मक बदलाव लाता है या सिर्फ राजनीतिक हलचल बनकर रह जाती है।

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