लातेहार में पुलिस और जनता के बीच मजबूत होता विश्वास: मिल रहा त्वरित न्याय

संजीव गिरी /लातेहार
नक्सल का गढ़ माने जाने वाला लातेहार .. कभी नक्सल प्रभावित गतिविधियों के साए में रहने लातेहार ..आज उसी ग्रामीण इलाकों में अब पुलिस की सक्रिय और सकारात्मक मौजूदगी देखने को मिल रही है। ये सब हुआ लातेहार जिले में एसपी कुमार गौरव के प्रभावी नेतृत्व और दूरदर्शी रणनीति से ..इस जिले में पुलिस और जनता के रिश्तों को एक नई मजबूती मिली है..

दरअसल जहां पहले ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल रहता था, वहीं अब पुलिस गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है, उनका त्वरित समाधान कर रही है और सामाजिक जागरूकता का संदेश दे रही है। एसपी कुमार गौरव के निर्देशानुसार, जिले के सभी थाना परिसरों में ‘थाना दिवस’ का नियमित आयोजन किया जा रहा है, जो जनता के लिए वरदान साबित हो रहा है।

थाना दिवस की मुख्य विशेषताएं
कुल मामलों की सुनवाई: हाल ही में आयोजित थाना दिवस के दौरान कुल 41 मामलों की सुनवाई की गई।
विवादों का स्वरूप: इनमें से 40 मामले भूमि विवाद से जुड़े थे और 1 मामला महिला से संबंधित था।
त्वरित निष्पादन: पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इनमें से 33 मामलों का निष्पादन थाना स्तर पर ही कर दिया।
जनता को राहत: इन मामलों के थाना स्तर पर ही सुलझ जाने से ग्रामीणों को अदालतों और कचहरी के चक्कर लगाने से राहत मिली है। इससे आम जनता के समय और धन दोनों की भारी बचत हुई है। ग्रामीणों ने पुलिस की इस पहल को जनहित में एक सराहनीय कदम बताया है।

सामुदायिक पुलिसिंग और जनसंवाद अभियान
एसपी कुमार गौरव की सामुदायिक पुलिसिंग की सोच के तहत पुलिस अधिकारी लगातार ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। इसी कड़ी में लातेहार अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संदीप कुमार गुप्ता ने चंदवा थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया।
इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से निम्नलिखित विषयों पर विशेष अपील की:
कुरीतियों का त्याग: डायन-बिसाही और ओझा-गुनी जैसी सामाजिक कुरीतियों तथा अंधविश्वासों से दूर रहने की अपील।
शिक्षा और कानून: बच्चों को शिक्षा दिलाने, कानून का पालन करने और आपसी भाईचारा बढ़ाने पर जोर।
सामाजिक सौहार्द: समाज में शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने का संदेश।

जाहिर है की एसपी कुमार गौरव की रणनीति केवल अपराध और नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुलिस और जनता के बीच अटूट विश्वास कायम करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।























