सिमडेगा में जंगली हाथी का तांडव: घर तोड़ने के बाद 66 वर्षीय ग्रामीण को दौड़ाकर कुचला, मौके पर मौत

शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा: ठेठईटांगर प्रखंड के ताराबोगा पंचायत अंतर्गत गावरधंसा नवाटोली में बुधवार रात जंगली हाथी के हमले में 66 वर्षीय ग्रामीण बिमल गुड़िया की दर्दनाक मौत हो गई। हाथी ने पहले एक घर को क्षतिग्रस्त किया और फिर जान बचाकर भाग रहे ग्रामीण को दौड़ाकर कुचल दिया। घटना के बाद पूरे गांव में शोक और दहशत का माहौल है।

मृतक की पहचान बिमल गुड़िया (66), पिता स्व. पौलुस गुड़िया के रूप में हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, बुधवार रात करीब 9 बजे जंगली हाथी गांव में घुस आया और सबसे पहले जुलतान गुड़िया के घर पर हमला कर उसे पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। हाथी ने घर में रखा अनाज भी खा लिया और काफी देर तक उत्पात मचाता रहा।


इसी दौरान बगल में रहने वाले बिमल गुड़िया अपनी जान बचाने के लिए घर से बाहर निकलकर भागने लगे, लेकिन हाथी ने उनका पीछा कर उन्हें पकड़ लिया और कुचल दिया। गंभीर चोटों के कारण उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। बताया गया कि मृतक के दोनों बेटे रोजी-रोटी के लिए बाहर मजदूरी करते हैं, जबकि घर पर उनकी दोनों बहुएं ही मौजूद थीं। घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।


गुरुवार सुबह सूचना मिलते ही वन विभाग, ठेठईटांगर पुलिस तथा भारत आदिवासी पार्टी के जिला अध्यक्ष सह PESA SLMT सदस्य अमृत चिराग तिर्की घटनास्थल पहुंचे। वन विभाग ने मृतक के परिजनों को तत्काल विभागीय सहायता प्रदान की और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, सिमडेगा भेज दिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक पर चिंता जताते हुए कहा कि आए दिन गांवों में हाथियों के प्रवेश से जान-माल का नुकसान हो रहा है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।


अमृत चिराग तिर्की ने मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार और वन विभाग से आश्रित परिवार को शीघ्र उचित मुआवजा, परिवार के योग्य सदस्य को रोजगार तथा हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने जुलतान गुड़िया के क्षतिग्रस्त घर का शीघ्र आकलन कर मुआवजा देने और हाथी प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की। घटनास्थल पर ताराबोगा मुखिया बलदेव सिंह, वाशिम अकराम समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।




















