Ravindra Nath Mahto during the flag-hoisting ceremony at the Legislative Assembly.

विधानसभा में ध्वजारोहण के दौरान बोले रवींद्र नाथ महतो- विकास के साथ सामाजिक समता और न्याय भी जरूरी

Ravindra Nath Mahto during the flag-hoisting ceremony at the Legislative Assembly.

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नवीन कुमार

रांची। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झारखंड विधानसभा परिसर में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने तिरंगा फहराया और उपस्थित जनप्रतिनिधियों, विधानसभा सचिवालय के पदाधिकारियों-कर्मचारियों तथा प्रेस एवं मीडिया के प्रतिनिधियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को नमन करते हुए लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक समता और झारखंड के समावेशी विकास को लेकर अपनी बात रखी।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि यह अपने इतिहास को स्मरण करने, वर्तमान का मूल्यांकन करने और भविष्य के भारत के प्रति अपने दायित्व को दोहराने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता किसी एक व्यक्ति, संस्था या क्षेत्र के संघर्ष का परिणाम नहीं थी। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा को जनशक्ति में बदला, जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक, लोकतांत्रिक और वैज्ञानिक भारत की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने स्वतंत्रता के लिए अदम्य साहस और पूर्ण समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया।

Ravindra Nath Mahto during the flag-hoisting ceremony at the Legislative Assembly.

झारखंड के वीरों को किया नमन

रवींद्र नाथ महतो ने झारखंड की धरती के वीर स्वतंत्रता सेनानियों और जननायकों को याद करते हुए कहा कि बाबा तिलका मांझी ने 1784 में अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ प्रतिरोध का बिगुल बजाया। सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने 1855 के संथाल हूल का नेतृत्व किया। धरती आबा बिरसा मुंडा ने औपनिवेशिक सत्ता को चुनौती देने के साथ-साथ अपने समाज के अधिकार, आत्मसम्मान और अस्तित्व की आवाज को मजबूत किया।

उन्होंने कहा कि इन सेनानियों की विरासत हमें सिखाती है कि स्वतंत्रता केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं थी, बल्कि सम्मान के साथ जीने और अपना भविष्य स्वयं निर्धारित करने की आकांक्षा भी थी।

Ravindra Nath Mahto during the flag-hoisting ceremony at the Legislative Assembly.

लोकतंत्र में विधानसभा की भूमिका महत्वपूर्ण

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता मिली, लेकिन इसके साथ राष्ट्र निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी भी आई। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और भारत ने स्वयं को संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव और मतदान तक सीमित नहीं है। संविधान की सर्वोच्चता, संस्थाओं की गरिमा, कानून का शासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति का सम्मान और नागरिकों के प्रति जवाबदेही भी लोकतंत्र के महत्वपूर्ण आधार हैं।

उन्होंने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का स्थान नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं, समस्याओं, असहमतियों और अपेक्षाओं का संवैधानिक मंच है। सरकार और विपक्ष की भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन लोकतंत्र की मर्यादा और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता साझा होनी चाहिए।

Ravindra Nath Mahto during the flag-hoisting ceremony at the Legislative Assembly.

विकास के साथ समता पर जोर

देश की आर्थिक यात्रा का उल्लेख करते हुए रविंद्र नाथ महतो कहा कि आजादी के शुरुआती दशकों में कृषि, सिंचाई, उद्योग, बिजली, वैज्ञानिक संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के निर्माण पर जोर दिया गया। हरित क्रांति ने खाद्यान्न सुरक्षा को मजबूत किया। इसके बाद 1991 के आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नया मोड़ दिया।

स्पीकर ने कहा  कि आज सूचना प्रौद्योगिकी, मोबाइल कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान और डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं ने अर्थव्यवस्था और शासन को नई दिशा दी है। भारत ने गरीबी कम करने, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका मजबूत करने में उल्लेखनीय प्रगति की है।

हालांकि उन्होंने कहा कि अब यह सवाल भी पूछा जाना चाहिए कि विकास की इस यात्रा में कौन-कौन साथ आगे बढ़े हैं और कौन अभी पीछे रह गया है।

Ravindra Nath Mahto during the flag-hoisting ceremony at the Legislative Assembly.

आंबेडकर के विचारों का उल्लेख

सामाजिक और आर्थिक असमानता का जिक्र करते हुए रवींद्र नाथ महतो ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में समानता मिलने के बावजूद सामाजिक और आर्थिक जीवन में असमानता बनी रह सकती है और यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती है।

स्पीकर ने कहा कि समानता का अर्थ हर नागरिक को समान संवैधानिक अधिकार देना है, जबकि समता का अर्थ सामाजिक या आर्थिक कारणों से पीछे रह गए लोगों को आगे आने के लिए आवश्यक अवसर और सहयोग उपलब्ध कराना है।

शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य को बताया जरूरी

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत के अगले विकास चरण की सबसे बड़ी चुनौती तेज आर्थिक विकास को अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण विकास में बदलना है।

उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और पोषण, युवाओं के लिए उत्पादक रोजगार, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, कृषि को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाने तथा छोटे उद्यमों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।

झारखंड के संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचे

झारखंड के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य के खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाली आर्थिक शक्ति का लाभ स्थानीय समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचना चाहिए।रविंद्र नाथ महतो ने यह भी कहा की संथाल क्षेत्र के लिए विकास का अर्थ केवल सड़क और भवन नहीं है। अच्छे विद्यालय, स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल, स्थानीय रोजगार, कृषि और वनोपज का उचित मूल्य तथा महिलाओं के लिए अवसर भी विकास के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा और संस्कृति के सम्मान के साथ आधुनिक अर्थव्यवस्था से जुड़ना जरूरी है। “विकास का अर्थ अपनी पहचान खोना नहीं; अपनी पहचान के साथ आगे बढ़ना है।”

असहमति लोकतंत्र की शक्ति

रवींद्र नाथ महतो ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी शक्ति है। प्रश्न पूछना लोकतंत्र की ताकत है और आलोचना लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है। हालांकि असहमति के साथ मर्यादा और राजनीतिक मतभेद के साथ पारस्परिक सम्मान भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को अधिकार देता है, लेकिन नागरिक कर्तव्यों की भी अपेक्षा करता है। संवैधानिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि संविधान की भावना को व्यवहार में उतारा जाए।

जन्म किसी व्यक्ति के भविष्य की सीमा तय न करे”

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संकल्प लेने का आह्वान करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को केवल स्मृति तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

उन्होंने ऐसे भारत के निर्माण की बात कही जहां लोकतंत्र मजबूत हो, संविधान सर्वोच्च हो, विकास तेज हो और अवसर अधिक न्यायपूर्ण हों। उन्होंने कहा कि समाज में किसी व्यक्ति का जन्म उसके भविष्य की सीमा तय न करे।

अंत में रवींद्र नाथ महतो ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को स्वतंत्र भारत दिया, संविधान निर्माताओं ने लोकतांत्रिक भारत की नींव रखी और अब वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह अधिक समतामूलक, समावेशी और विकसित भारत का निर्माण करे।

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