धनबाद में आवारा कुत्तों का आतंक: छह साल की बच्ची पर झुंड ने किया हमला, एक महीने में 175 लोगों के घायल होने का दावा
धनबाद। देश की कोयला राजधानी धनबाद में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर के अलग-अलग इलाकों से कुत्तों के झुंड द्वारा लोगों पर हमला किए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ताजा मामला जगजीवन नगर कॉलोनी के पास का है, जहां आवारा कुत्तों के झुंड ने दो बच्चों पर हमला कर दिया। स्थानीय लोगों ने समय रहते हस्तक्षेप कर छह साल की बच्ची को बचा लिया, लेकिन तब तक कुत्ते उसे नोच चुके थे। बच्ची की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!स्थानीय स्तर पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में धनबाद शहर और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों के हमले में करीब 175 लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग से होना अभी बाकी है।

महिला की मौत और राहगीरों पर हमले से बढ़ी चिंता
बताया जा रहा है कि पिछले महीने न्यू झरिया इलाके में एक महिला भी आवारा कुत्तों के हमले में घायल हुई थी। इलाज के दौरान उसकी मौत होने की बात सामने आई है। इस घटना ने शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण और घटना के संबंध में आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
वहीं, बिग बाजार के पास भी राहगीरों पर आवारा कुत्तों के हमले की शिकायत सामने आई है। इनमें गोविंदपुर निवासी प्रीतम वर्मा के घायल होने और हाथ में फ्रैक्चर होने की जानकारी दी गई है।

नगर निगम की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
लगातार हो रही घटनाओं के बीच नागरिकों और कारोबारियों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन इनके नियंत्रण के लिए प्रभावी और नियमित अभियान नजर नहीं आ रहा है।
झरिया के व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम ने जल्द ही आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने, सुरक्षित शेल्टर की व्यवस्था करने, टीकाकरण और नसबंदी अभियान को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
व्यापारियों का कहना है कि आवारा कुत्तों के डर से ग्राहक बाजार आने से भी बच रहे हैं, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है।

टीकाकरण और नसबंदी अभियान की जरूरत
पशु-नियंत्रण से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, समस्या से निपटने के लिए केवल कुत्तों को पकड़ना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए बड़े पैमाने पर एंटी-रेबीज टीकाकरण, नसबंदी, सुरक्षित शेल्टर, कचरा प्रबंधन और नियमित निगरानी की जरूरत है।
साथ ही, कुत्तों के हमले में घायल लोगों के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता और आवश्यकता के अनुसार रेबीज पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है।
नागरिकों में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण धनबाद के कई इलाकों में लोगों में भय और नाराजगी का माहौल है। नागरिकों की मांग है कि नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर समस्या का स्थायी समाधान निकाले। यदि प्रशासन समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाता है, तो नागरिकों का आक्रोश आंदोलन का रूप ले सकता है। सवाल यह है कि अगली घटना का इंतजार करने के बजाय जिम्मेदार विभाग कब ठोस कार्रवाई करेंगे?


















