आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: 70% कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रैबिज टीकाकरण अनिवार्य

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: 70% कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रैबिज टीकाकरण अनिवार्य

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नई दिल्ली : देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और इससे जुड़े खतरों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद केंद्र सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्देश जारी किए हैं, जिसमें कम से कम 70 प्रतिशत आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रैबिज टीकाकरण को अनिवार्य कर दिया गया है। यह फैसला देश में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं और रेबीज के खतरे को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त 2025 को अपने 11 अगस्त के आदेश में संशोधन करते हुए कहा था कि आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उनके मूल स्थान पर छोड़ा जा सकता है, सिवाय उन कुत्तों के जो रेबीज से संक्रमित हैं या आक्रामक व्यवहार प्रदर्शित करते हैं। कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक लगाई और प्रत्येक वार्ड में निर्धारित फीडिंग पॉइंट बनाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में पक्षकार बनाकर एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने की दिशा में कदम उठाने को कहा।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को गंभीरता से लेते हुए तीन मंत्रालयों—मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और गृह मंत्रालय—के सहयोग से एक मास्टर एक्शन प्लान तैयार किया है। इस प्लान के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक वर्ष के भीतर 70 प्रतिशत आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रैबिज टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करना होगा। अनुमान के मुताबिक, देश में करीब 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते हैं, और हर साल 37 लाख से अधिक कुत्तों के काटने के मामले सामने आते हैं, जिनमें से हर पांचवां पीड़ित बच्चा होता है।

केंद्र सरकार ने राज्यों को एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें स्थानीय निकायों और नगर निगमों को शेल्टर होम की व्यवस्था करने, नसबंदी केंद्रों की संख्या बढ़ाने और टीकाकरण की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है, जिसमें व्यक्तियों पर 25,000 रुपये और एनजीओ पर 2,00,000 रुपये तक का जुर्माना शामिल है।

हालांकि, इस फैसले का कुछ पशु प्रेमी और कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने इसे “निराशाजनक” बताते हुए कहा कि आवारा कुत्ते समस्या नहीं, बल्कि भय, भूख और क्रूरता के शिकार हैं। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कोर्ट के संशोधित आदेश का स्वागत किया, इसे पशु कल्याण और जन सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने वाला कदम बताया।

विशेषज्ञों का कहना है कि नसबंदी और टीकाकरण का यह अभियान रेबीज जैसी घातक बीमारी को नियंत्रित करने में मदद करेगा, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल 59,000 लोगों की जान लेती है। केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन अब इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं, ताकि मानव-पशु संघर्ष को कम किया जा सके और सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सके।

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