PM नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान, ‘ओली दाराजली दोस्तलिक’ से नवाजा गया
नवीन कुमार
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ताशकंद, । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ओली दाराजली दोस्तलिक’ (Order of Oliy Darajali Do‘stlik) से सम्मानित किया गया। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने ताशकंद स्थित कुक्सरॉय प्रेसिडेंशियल पैलेस में प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान प्रदान किया। यह मोदी को मिला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान बताया जा रहा है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सदियों पुराने रिश्तों तथा साझा सांस्कृतिक विरासत को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ‘दोस्तलिक’ का अर्थ दोस्ती है और यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि भारत के 140 करोड़ लोगों का सम्मान है। मोदी ने उज्बेकिस्तान की सरकार और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव का आभार जताते हुए दोनों देशों की दोस्ती को आगे और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत-उज्बेकिस्तान संबंध अब ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा पर रहे। यह उनकी उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है। यात्रा के दौरान मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच कुक्सरॉय में विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों देशों ने अपने रिश्तों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई।
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहली बार एक अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। दोनों देशों के बीच सीधी हवाई कनेक्टिविटी भी बढ़ी है।
यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति पर बड़ा समझौता
भारत और उज्बेकिस्तान ने यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति जताई है। भारत की बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ खनन और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

व्यापार बढ़ाने और संस्थागत तंत्र मजबूत करने पर जोर
दोनों देशों ने आर्थिक रिश्तों को नई गति देने के लिए व्यापार और निवेश सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों का लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से काफी आगे ले जाना है। रिपोर्टों के मुताबिक, 2030 तक व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी सामने रखा गया है।
इसके साथ ही विदेश मंत्री स्तर पर कोऑर्डिनेशन काउंसिल जैसे संस्थागत तंत्र को मजबूत करने और संयुक्त आयोग को उच्च स्तर पर ले जाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। दोनों देशों के कारोबारी नेताओं की भागीदारी के साथ संयुक्त बिजनेस समिट आयोजित करने पर भी जोर दिया गया।
सिस्टर सिटी और सिस्टर स्टेट समझौते
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सिस्टर-सिटी और सिस्टर-स्टेट सहयोग को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर व्यापार, निवेश, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना है।
इसके अलावा न्यू ताशकंद और गुजरात की GIFT City जैसे बड़े विकास परियोजनाओं के अनुभवों और सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
‘विकसित भारत’ और ‘नया उज्बेकिस्तान’ के साझा विजन पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने ‘विकसित भारत’ और ‘यांगी उज्बेकिस्तान’ (नया उज्बेकिस्तान) के साझा विजन को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने वैश्विक दक्षिण के हितों से जुड़े मुद्दों पर भी साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया।
जाहिर है मोदी की इस यात्रा को भारत और मध्य एशिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ उन्हें उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च राजकीय सम्मान मिला, तो दूसरी तरफ दोनों देशों ने अपने संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचाने का फैसला किया। यूरेनियम आपूर्ति, व्यापार, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और निवेश में बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में भारत-उज्बेकिस्तान रिश्तों का नया आधार बन सकता है।

















