विहिप के 62वें स्थापना दिवस पर हिंदू समाज की एकजुटता का आह्वान

शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा: आनंद भवन धर्मशाला में रविवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) का 62वां स्थापना दिवस उत्साह और धार्मिक वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में विहिप के क्षेत्रीय संगठन मंत्री विजय प्रताप सिंह मुख्य अतिथि और रंगनाथ महतो विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। अध्यक्षता विहिप के सिमडेगा जिला अध्यक्ष कौशल राज सिंह देव ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता और भगवान श्रीकृष्ण के पूजन के साथ हुई। इसके बाद ॐकार ध्वनि के बीच स्थापना दिवस सत्र का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में विहिप के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

विशिष्ट अतिथि रंगनाथ महतो ने विहिप के स्थापना इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संगठन की स्थापना वर्ष 1964 में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन हुई थी। संत-महात्माओं के मार्गदर्शन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर की प्रेरणा से हिंदू समाज को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से इसकी नींव रखी गई थी।
मुख्य अतिथि विजय प्रताप सिंह ने कहा कि विहिप की स्थापना के समय हिंदू समाज विभिन्न पूजा पद्धतियों, जातियों और सामाजिक वर्गों में बंटा हुआ था। ऐसे में सामाजिक एकता और समरसता स्थापित करना संगठन के प्रमुख उद्देश्यों में रहा है। उन्होंने सामाजिक भेदभाव और अस्पृश्यता जैसी कुरीतियों को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास करने की बात कही।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच बनाने और सेवा कार्यों को मजबूत करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने राम मंदिर आंदोलन समेत धर्मांतरण, लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे मुद्दों पर संगठन की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम के अंत में कार्यकर्ताओं ने संगठन के मूल उद्देश्यों को आगे बढ़ाने तथा सेवा, संस्कार और सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया।
















