झारखंड में बाढ़ का संकट गहराया: साहिबगंज में गंगा 28.71 मीटर पर, पाकुड़ में 5 साल की बच्ची की डूबने से मौत
रांची/साहिबगंज/पाकुड़। झारखंड के संथाल परगना में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। साहिबगंज में गंगा नदी का जलस्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 11 सितंबर 2026 की रात 1 बजे साहिबगंज में गंगा का जलस्तर 28.71 मीटर दर्ज किया गया। यहां नदी का डेंजर लेवल 27.25 मीटर है। यानी गंगा खतरे के स्तर से करीब 1.46 मीटर ऊपर बह रही है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इससे पहले 10 सितंबर की शाम 6 बजे गंगा का जलस्तर 28.70 मीटर दर्ज किया गया था। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण जिले के कई बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। दियारा क्षेत्र के कई गांवों में पानी पहुंचने से लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है।
चार साल का रिकॉर्ड टूटने की बात पर सावधानी
साहिबगंज में 28.70 मीटर का जलस्तर बेहद गंभीर है, लेकिन इसे सीधे तौर पर ‘चार वर्षों का रिकॉर्ड’ कहना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में गंगा का जलस्तर साहिबगंज में 28.90 मीटर तक पहुंचा था, जबकि 2025 में यह 28.70 मीटर तक गया था। इसलिए 28.70 मीटर को चार साल का सर्वाधिक स्तर बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

पाकुड़ में पांच साल की बच्ची बाढ़ के पानी में डूबी
उधर, पाकुड़ के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के फरसा गांव में पांच वर्षीय बच्ची के बाढ़ के पानी में डूबने की घटना सामने आई है। 10 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार बच्ची सड़क पर जमा बाढ़ के पानी में नहा रही थी। इसी दौरान वह गहरे पानी में चली गई और डूब गई। पुलिस, ग्रामीणों और स्थानीय गोताखोरों ने उसकी तलाश शुरू की थी।
यदि 11 सितंबर को बच्ची का शव बरामद होने की पुलिस पुष्टि हो चुकी है, तो खबर में यह अपडेट जोड़ा जा सकता है। अभी उपलब्ध स्वतंत्र रिपोर्ट में घटना के समय तलाश जारी होने की जानकारी है।
प्रशासन अलर्ट
साहिबगंज में जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार उपायुक्त ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री भी वितरित की।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए नदी, तालाब और जलजमाव वाले क्षेत्रों में लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। खासकर बच्चों को ऐसे इलाकों में अकेले नहीं जाने देने की जरूरत है।

















