जमशेदपुर : 7 महीने बाद भी नहीं बनी बायोमेडिकल वेस्ट कमेटी, भाजपा ने हेमंत सरकार पर साधा निशाना
जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले में सरकारी अस्पतालों समेत स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमेडिकल वेस्ट के प्रबंधन को लेकर भाजपा ने हेमंत सोरेन सरकार पर सवाल उठाए हैं। भाजपा ने सोमवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट की कटिंग के साथ एआई से तैयार तस्वीर साझा करते हुए दावा किया कि हाईकोर्ट के निर्देश के करीब सात महीने बाद भी जमशेदपुर के कई अस्पतालों और नर्सिंग होम में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमेटियों का गठन नहीं हुआ है।

भाजपा की ओर से साझा की गई रिपोर्ट के अनुसार, जमशेदपुर में करीब 154 अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित हैं। इनमें 30 से अधिक बेड वाले 35 स्वास्थ्य संस्थान हाईकोर्ट के निर्देश के दायरे में आते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन संस्थानों में बायोमेडिकल वेस्ट के बेहतर प्रबंधन के लिए निर्धारित व्यवस्था अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है।
26 फरवरी को हाईकोर्ट ने दिए थे निर्देश
रिपोर्ट में 26 फरवरी 2026 को झारखंड हाईकोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों का हवाला दिया गया है। इसके तहत 30 से अधिक बेड वाले अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी गठित करने तथा छोटे अस्पतालों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने की बात कही गई थी।
इसके अलावा अस्पतालों को अपने यहां बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की मौजूदा व्यवस्था का गैप एनालिसिस करने और कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे।

एमजीएम और सदर अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल
भाजपा की ओर से साझा की गई रिपोर्ट में जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल और सदर अस्पताल में भी बायोमेडिकल वेस्ट के प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कुछ स्थानों पर मेडिकल कचरा जमा होने का दावा किया गया है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एमजीएम और सदर अस्पताल से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट को अधिकृत एजेंसी के माध्यम से आदित्यपुर स्थित ट्रीटमेंट प्लांट भेजा जाता है।
भाजपा ने पूछा- क्या यही है झारखंड का हेल्थ मॉडल?
भाजपा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अदालत के निर्देश के बावजूद मेडिकल वेस्ट के उचित प्रबंधन में लापरवाही गंभीर मामला है। पार्टी का कहना है कि संक्रमित मेडिकल कचरे के सही तरीके से संग्रह, परिवहन और निस्तारण की व्यवस्था में कमी रहने पर मरीजों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और आम लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकता है।
भाजपा ने राज्य सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि “क्या यही झारखंड का हेल्थ मॉडल है?”

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