झारखंड में सरकारी डॉक्टर 9-10 अक्टूबर को लगाएंगे काला बिल्ला, 21 को प्रदर्शन; 22 से हड़ताल की चेतावनी
DACP, डॉक्टरों की सुरक्षा, खाली पदों पर नियुक्ति समेत कई मांगें; IMA समेत 9 चिकित्सा संगठन आंदोलन में शामिल
रांची। झारखंड में सरकारी और गैर-सरकारी डॉक्टरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) झारखंड समेत कई चिकित्सा संगठनों ने संयुक्त रूप से आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। अब आंदोलन के तहत 9 और 10 अक्टूबर को डॉक्टर काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे। इसके बाद 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा। मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर 22 अक्टूबर से पेन-डाउन यानी संपूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू करने की चेतावनी दी गई है। इस आंदोलन में डॉक्टरों की सुरक्षा, मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन, सरकारी चिकित्सकों के लिए DACP (Dynamic Assured Career Progression), खाली पदों पर नियमित नियुक्ति, Clinical Establishment Act में संशोधन, जूनियर डॉक्टरों की समस्याओं, आयुष्मान भारत के भुगतान और मेडिकल छात्रों के स्टाइपेंड समेत कई मुद्दे शामिल हैं।

9 और 10 अक्टूबर को काला बिल्ला लगाकर काम
IMA और सहयोगी संगठनों ने आंदोलन के कार्यक्रम में बदलाव किया है। ताजा कार्यक्रम के अनुसार डॉक्टर 9 और 10 अक्टूबर को काला बिल्ला लगाकर विरोध दर्ज कराएंगे। 5 अक्टूबर को IMA और नौ अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों की ओर से राज्यपाल, झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को ज्ञापन सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। IMA की ओर से सोशल मीडिया के माध्यम से भी मांगों को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इससे पहले घोषित कार्यक्रम में 5 से 8 अक्टूबर तक काला बिल्ला लगाने और 9 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की योजना थी। बाद में तारीखों में बदलाव किया गया।

21 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन
आंदोलन के अगले बड़े चरण में 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें सरकारी और निजी क्षेत्र के डॉक्टरों की भागीदारी प्रस्तावित है।चिकित्सक संगठनों का कहना है कि यदि 21 अक्टूबर तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती है, तो 22 अक्टूबर से पूरे राज्य में कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा।

करीब 1200 सरकारी डॉक्टरों के आंदोलन में शामिल होने की बात
अलग से झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (JHASA) ने भी सरकारी डॉक्टरों की सेवा संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन की घोषणा की है। सितंबर में हुई संघ की बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से 120 से अधिक डॉक्टर शामिल हुए थे। संघ ने बताया था कि मांगें नहीं मानी गईं तो करीब 1200 सरकारी डॉक्टर 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार कर सकते हैं। JHASA की प्रमुख मांगों में सरकारी चिकित्सकों के लिए DACP लागू करना, रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति, संविदा नियुक्ति नियमों में बदलाव और सेवानिवृत्ति आयु से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

क्या है डॉक्टरों की DACP की मांग?
DACP यानी Dynamic Assured Career Progression डॉक्टरों के करियर में समयबद्ध वित्तीय/पदोन्नति लाभ से जुड़ी व्यवस्था है। डॉक्टर संगठन चाहते हैं कि झारखंड में भी केंद्र और बिहार की तर्ज पर इसे लागू किया जाए। JHASA का कहना है कि वर्ष 2015 में विशेषज्ञ चिकित्सक संवर्ग से जुड़े प्रावधान बनाए गए थे, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए DACP की स्पष्ट व्यवस्था अब तक नहीं बन पाई है।संघ के अनुसार बिहार में चिकित्सकों को 20 वर्षों में चार बार DACP का लाभ मिलता है, जबकि झारखंड में डॉक्टरों को 25 वर्ष की सेवा अवधि में लाभ मिलने की व्यवस्था से जुड़ी शिकायत है। इसलिए डॉक्टर संगठन केंद्र और बिहार के अनुरूप व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

1422 डॉक्टरों के पद खाली होने का दावा
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को लेकर भी चिकित्सक संगठन सवाल उठा रहे हैं। JHASA के अनुसार, JPSC के माध्यम से भरे जाने वाले चिकित्सकों के 1,422 पद खाली हैं। संघ ने इन पदों पर नियमित नियुक्ति के लिए परीक्षा कैलेंडर जारी करने और भर्ती प्रक्रिया तेज करने की मांग की है। संघ का कहना है कि राज्य में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए पहले स्वीकृत पदों पर नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए।

सेवानिवृत्ति आयु घटाने का भी विरोध
सरकारी चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु को 67 वर्ष से घटाकर 65 वर्ष किए जाने के मुद्दे पर भी JHASA ने आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि चिकित्सकों की सेवा शर्तों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने से पहले संबंधित संगठनों से बातचीत की जानी चाहिए।
मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग
संयुक्त आंदोलन में डॉक्टरों की सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। चिकित्सक संगठनों ने झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू करने और डॉक्टरों, जूनियर डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों तथा महिला चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।डॉक्टर संगठनों का कहना है कि अस्पतालों और चिकित्सकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर त्वरित कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
50 बेड तक के अस्पतालों को Clinical Establishment Act से बाहर करने की मांग
निजी अस्पतालों और क्लीनिकों से जुड़े मुद्दे भी संयुक्त आंदोलन के एजेंडे में हैं। संगठनों ने 50 बेड तक के छोटे एवं मध्यम अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को Clinical Establishment Act के दायरे से बाहर रखने की मांग की है।इसके साथ ही 50 बेड से अधिक क्षमता वाले अस्पतालों के लिए नियमों को व्यावहारिक बनाने की मांग भी रखी गई है।
आयुष्मान योजना के भुगतान में सुधार की मांग
डॉक्टर संगठनों ने आयुष्मान भारत/PM-JAY के तहत निजी अस्पतालों को मिलने वाले पैकेज रेट और भुगतान से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं।उनकी मांग है कि पैकेज दरों को उचित बनाया जाए, लंबित क्लेम का समय पर भुगतान हो और अस्पतालों को अनावश्यक कटौती तथा दंडात्मक कार्रवाई से राहत देने के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई जाए।
अस्पतालों के लिए Single Window System की मांग
अस्पतालों के लाइसेंस, नवीनीकरण, एनओसी और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए Single Window System लागू करने की मांग भी साझा एजेंडे में शामिल है। डॉक्टर संगठनों का कहना है कि इससे अस्पतालों से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और समयबद्ध हो सकती हैं।
जूनियर डॉक्टर और मेडिकल छात्रों के मुद्दे भी शामिल
आंदोलन के एजेंडे में जूनियर डॉक्टरों की समस्याओं को भी शामिल किया गया है। इनमें समय पर वेतन, मातृत्व अवकाश एवं लाभ, संविदा संबंधी समस्याएं और पारदर्शी भर्ती कैलेंडर जैसे मुद्दे हैं।वहीं मेडिकल छात्रों को समय पर स्टाइपेंड देने और निजी मेडिकल कॉलेजों में स्टाइपेंड से कथित अनधिकृत कटौती रोकने की मांग भी की गई है।
किन संगठनों की भागीदारी?
संयुक्त आंदोलन में IMA Jharkhand, JHASA, IMA HBI, AHPI, FAIMA, Junior Doctors Network (JDN), Junior Doctors Association (JDA), IMA Women’s Wing और Medical Student Network (MSN) समेत विभिन्न चिकित्सा संगठनों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
आंदोलन का मौजूदा कार्यक्रम
तारीख| कार्यक्रम
9-10 अक्टूबर| काला बिल्ला लगाकर विरोध
10-20 अक्टूबर| जिला स्तर पर बैठकें और जनसंपर्क
21 अक्टूबर| राज्यव्यापी प्रदर्शन
22 अक्टूबर| मांगें नहीं मानी गईं तो पेन-डाउन/कार्य बहिष्कार
सरकारी अस्पतालों की सेवाओं पर पड़ सकता है असर
यदि 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार शुरू होता है, तो इसका असर सरकारी अस्पतालों की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने की आशंका है। सितंबर में JHASA ने करीब 1200 सरकारी डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार की बात कही थी और सदर अस्पतालों तथा ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर असर पड़ने की संभावना जताई थी। हालांकि, इमरजेंसी और आवश्यक सेवाओं के संचालन को लेकर अंतिम व्यवस्था संबंधित डॉक्टर संगठनों और स्वास्थ्य विभाग के निर्णय पर निर्भर करेगी। डॉक्टर संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित सेवा, सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का समाधान कराना है। अब निगाहें सरकार की ओर हैं कि 21 अक्टूबर से पहले इन मांगों पर क्या पहल होती है।

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