गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का वो सीन जो रील नहीं, रियल था: धनबाद में 22 साल बाद आया फैसला
धनबाद। रात का सन्नाटा… अचानक गोलियों की आवाज… एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग और जान बचाने के लिए छत से छलांग लगाता एक शख्स। अगर आपने अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ देखी है, तो यह दृश्य आपके जेहन में जरूर होगा। लेकिन वासेपुर की कहानी का यह हिस्सा सिर्फ सिनेमाई कल्पना नहीं था। इसके पीछे धनबाद की एक वास्तविक और खूनी घटना थी, जिसने 29 जनवरी 2004 की रात पूरे कोयलांचल को हिला दिया था।
अब उसी चर्चित फायरिंग कांड में 22 साल बाद धनबाद की अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को शाहिद आलम, शहादत हुसैन और पटना निवासी कथित शूटर तनवीर आलम को दोषी ठहराया। अदालत अब तीनों की सजा के बिंदु पर 3 अक्टूबर 2026 को सुनवाई करेगी।

29 जनवरी 2004 की वह रात, जब वासेपुर में गूंजी थीं AK-47 की गोलियां
मामला 29 जनवरी 2004 की रात का है। वासेपुर के कमर मखदूमी रोड स्थित गैंगस्टर फहीम खान के घर को हथियारबंद हमलावरों ने निशाना बनाया था। पुलिस और अभियोजन से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, हमलावरों ने एके-47 समेत अत्याधुनिक हथियारों से घर पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। फायरिंग इतनी जबरदस्त थी कि इलाके में अफरा-तफरी मच गई। उस वक्त फहीम खान घर के अंदर मौजूद थे। उन्होंने किसी तरह पड़ोसी की छत पर कूदकर अपनी जान बचाई। हमले में उनके बॉडीगार्ड विनोद शर्मा, जो बिहार के अरवल के रहने वाले थे, की मौत हो गई। घटना में शाहिद के पैर में भी गोली लगी थी। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावरों के भागने के दौरान पुलिस की टीम ने उनका पीछा किया था। पुलिस के साथ मुठभेड़ में एक कथित शूटर के मारे जाने और कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी की बात भी सामने आई थी।

केस में 22 साल तक चली कानूनी लड़ाई
फायरिंग के बाद फहीम खान की शिकायत पर हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। शुरुआती मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था।समय के साथ इस मुकदमे में कई आरोपी अलग-अलग कारणों से ट्रायल से बाहर हुए। कुछ आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो गई, जबकि कुछ के खिलाफ फरारी की स्थिति में कार्रवाई चलती रही। अंततः शाहिद आलम, शहादत हुसैन और तनवीर आलम के खिलाफ ट्रायल पूरा हुआ।अभियोजन पक्ष ने अदालत में 18 गवाहों की गवाही कराई। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहियों की समीक्षा के बाद तीनों को षड्यंत्र, एकमत होकर हत्या के प्रयास और अवैध हथियार से जुड़े आरोपों में दोषी माना।

फिल्म में दिखा था वासेपुर का ‘रियल’ शूटआउट
अनुराग कश्यप की 2012 में रिलीज हुई ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने धनबाद और वासेपुर की गैंगवार की कहानियों को देशभर में चर्चा में ला दिया। फिल्म के शुरुआती हिस्से में एक हथियारबंद गिरोह को एक घर पर हमला करते हुए दिखाया गया है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी ने सुल्तान कुरैशी का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी वास्तविक वासेपुर-धनबाद की गैंगवार की घटनाओं से प्रेरित थी, हालांकि फिल्म और वास्तविक घटनाओं के बीच कई अंतर भी हैं। उपलब्ध विवरणों में जनवरी 2004 के वासेपुर हमले को फिल्म के शुरुआती दृश्य से जोड़ा गया है।यानी पर्दे पर दिखाई गई गोलियों की वह बारिश सिर्फ फिल्मी कहानी नहीं थी। उसके पीछे धनबाद की एक वास्तविक हिंसक घटना की छाया थी।
फिल्म और हकीकत में फर्क भी समझना जरूरी
हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि फिल्म की कहानी पूरी तरह इसी एक घटना पर आधारित है। ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ वास्तविक धनबाद की गैंगवार, कोयला कारोबार, परिवारों की दुश्मनी और अपराध की घटनाओं से प्रेरित थी, लेकिन फिल्म में कई किरदार, घटनाएं और उनके आपसी संबंध सिनेमाई रूप से बदले गए थे।इसलिए 2004 के फायरिंग कांड को फिल्म के किसी एक किरदार या दृश्य से पूरी तरह समान मानना सही नहीं होगा।
22 साल बाद अदालत का फैसला
करीब 22 साल और आठ महीने बाद इस मामले में दोषसिद्धि हुई है। अदालत ने शाहिद आलम, शहादत हुसैन और तनवीर आलम को दोषी माना है।अब अगली महत्वपूर्ण तारीख 3 अक्टूबर 2026 है। उस दिन अदालत यह तय करेगी कि दोषी ठहराए गए तीनों आरोपियों को किस अवधि की सजा दी जाए।
वासेपुर की गैंगवार का एक और अध्याय
धनबाद और वासेपुर का नाम लंबे समय से कोयला कारोबार, गैंगवार और आपराधिक संघर्ष की खबरों से जुड़ा रहा है। 2004 का यह मामला उसी दौर की हिंसक घटनाओं में से एक था। फिल्म ने जिस वासेपुर को देशभर के दर्शकों के सामने सिनेमाई अंदाज में पेश किया, उसकी असली जमीन पर हुई इस घटना में गोलियां सच में चली थीं, एक जान गई थी और कई लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई थी।22 साल बाद अदालत का फैसला इस पुराने मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव है। अब निगाहें 3 अक्टूबर पर हैं, जब दोषियों की सजा पर अदालत अपना फैसला सुनाएगी।

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