कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय शक्ति आराधना का शुभारंभ, जानिए पूजा सामग्री, स्थापना की विधि और माता को अर्पित किए जाने वाले भोग का महत्व

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आज से हो रही है। पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इसे घटस्थापना भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को भगवान गणेश, त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश तथा नवग्रहों का प्रतीक माना जाता है। कलश स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाली देवी आराधना, व्रत और शक्ति साधना का संकल्प लिया जाता है।

पश्चिम बंगाल के ज्योतिषी राहुल डे के अनुसार, कलश स्थापना नवरात्रि की पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मान्यता है कि विधि-विधान से घटस्थापना करने के बाद ही नवरात्रि की पूजा का संकल्प पूरा किया जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए पूजा की आवश्यक सामग्री और स्थापना की सही विधि जानना जरूरी है।

कलश स्थापना के लिए जरूरी सामग्री
कलश स्थापना के लिए तांबे, पीतल या मिट्टी का साफ कलश, जल और गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, लाल कपड़े में लिपटा नारियल, कलावा, अक्षत, रोली, कुमकुम, हल्दी, फूल, फूलों की माला, दीपक, रुई की बत्ती, घी या तेल, अगरबत्ती, कपूर, पूजा की थाली, सुपारी, सिक्का और साफ उपजाऊ मिट्टी की जरूरत होती है। जौ बोने के लिए मिट्टी का चौड़ा पात्र और जौ के बीज भी रख लें।

कैसे करें कलश स्थापना?
कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। एक चौड़े पात्र में साफ मिट्टी भरकर जौ बो दें। इसके बाद मिट्टी के पात्र के बीच में कलश रखने की व्यवस्था करें। यदि जौ बोने के लिए अलग पात्र नहीं है, तो परंपरा के अनुसार कलश के नीचे अक्षत का छोटा ढेर भी बनाया जा सकता है।

अब कलश को साफ जल या गंगाजल से लगभग तीन-चौथाई भरें। इसमें एक सिक्का, अक्षत, सुपारी और थोड़ी हल्दी डालें। इसके बाद कलश के गले में कलावा बांधते हुए भगवान का स्मरण करें। कलश के मुंह पर आम या अशोक के पांच अथवा सात पत्ते इस तरह लगाएं कि उनके सिरे बाहर की ओर रहें। फिर लाल कपड़े में लिपटे नारियल को पत्तों के ऊपर स्थापित करें। अंत में कलश पर रोली और कुमकुम का तिलक लगाकर फूल और अक्षत अर्पित करें।

कलश स्थापना के बाद भगवान गणेश, देवी-देवताओं और वरुण देव का आह्वान करें। दीपक और अगरबत्ती जलाएं, नैवेद्य अर्पित करें और कलश के सामने आरती करें। इस प्रकार विधि-विधान से घटस्थापना की जाती है। पूजा के दौरान श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित के निर्देशों का भी पालन कर सकते हैं।

मां शैलपुत्री को अर्पित करें घी का भोग
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता को शुद्ध गाय के घी का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। घी से बनी खीर या पेड़ा भी भोग में चढ़ाया जा सकता है। मान्यता है कि मां शैलपुत्री को घी अर्पित करने से भक्तों को आरोग्य और शारीरिक शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पहले दिन के रंग को लेकर क्या है मान्यता?
नवरात्रि के पहले दिन के रंग को लेकर अलग-अलग परंपराओं में भिन्न मान्यताएं मिलती हैं। कुछ मान्यताओं में नारंगी रंग को उत्साह, ऊर्जा और सफलता का प्रतीक माना गया है। श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार इस रंग के वस्त्र पहनकर मां शैलपुत्री की पूजा कर सकते हैं। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए समर्पित होते हैं। श्रद्धालु इन दिनों पूजा-अर्चना, व्रत और साधना के माध्यम से सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए देवी से प्रार्थना करते हैं।
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