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DPDP कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे 21 मीडिया संस्थान, केंद्र सरकार को नोटिस; पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर उठे सवाल

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नई दिल्ली: डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून को लेकर देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों और केंद्र सरकार के बीच कानूनी विवाद तेज हो गया है। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) के माध्यम से 21 मीडिया संस्थानों ने कानून के कई प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मीडिया संस्थानों का कहना है कि पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट नहीं होने से खोजी पत्रकारिता, सूचना के अधिकार और समाचारों के प्रकाशन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने कानून के विवादित प्रावधानों पर तत्काल रोक लगाने के अनुरोध पर केंद्र का पक्ष सुने बिना अंतरिम राहत देने से इनकार किया। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित की गई है।

पत्रकारिता के लिए अलग छूट की मांग

DNPA की याचिका में प्रमुख चिंता यह है कि DPDP कानून में पत्रकारिता संबंधी गतिविधियों के लिए स्पष्ट और व्यापक छूट नहीं दी गई है। एसोसिएशन का तर्क है कि व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाए गए नियमों का इस्तेमाल यदि समाचार संकलन और प्रकाशन पर भी उसी तरह लागू किया गया, तो भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं और सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों की जांच कठिन हो सकती है। याचिका में कहा गया है कि किसी व्यक्ति के बारे में खोजी रिपोर्ट तैयार करने से पहले उसकी सहमति लेने की बाध्यता पत्रकारों के कामकाज को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से उन मामलों में परेशानी हो सकती है, जहां किसी सरकारी अधिकारी, कारोबारी या अन्य प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोपों की पड़ताल की जा रही हो।

खबर हटाने के दबाव की आशंका

मीडिया संस्थानों ने कानून के तहत व्यक्तिगत डेटा से जुड़ी सहमति वापस लेने और डेटा मिटाने के अधिकार को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि किसी रिपोर्ट में उल्लिखित व्यक्ति डेटा हटाने की मांग करता है और इसका समाचार प्रकाशन पर असर पड़ता है, तो मीडिया संस्थानों पर प्रकाशित सामग्री हटाने या उसमें बदलाव करने का दबाव बन सकता है। एसोसिएशन के अनुसार, सार्वजनिक हित में प्रकाशित तथ्यात्मक खबरों को हटाने की ऐसी संभावनाएं पत्रकारिता की भूमिका और सार्वजनिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, यह याचिकाकर्ताओं की आशंका है; इसका वास्तविक कानूनी दायरा अदालत के निर्णय और कानून की व्याख्या पर निर्भर करेगा।

गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा पर भी चिंता

याचिका में केंद्र सरकार को डेटा उपलब्ध कराने के लिए दी गई शक्तियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। मीडिया संस्थानों का तर्क है कि इन शक्तियों के इस्तेमाल से पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों और सूचना देने वालों की पहचान उजागर होने का जोखिम पैदा हो सकता है। भ्रष्टाचार, कॉरपोरेट अनियमितताओं और चुनावी गड़बड़ियों से जुड़ी जानकारी देने वाले लोग यदि अपनी पहचान सामने आने से डरेंगे, तो वे पत्रकारों तक महत्वपूर्ण सूचनाएं पहुंचाने से बच सकते हैं। इससे खोजी पत्रकारिता और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

किन मीडिया संस्थानों से जुड़ा है मामला?

Digital News Publishers Association देश के कई प्रमुख समाचार प्रकाशकों के डिजिटल कारोबार का प्रतिनिधित्व करती है। इस मामले में जिन मीडिया समूहों का उल्लेख किया गया है, उनमें Network18, NDTV, The Indian Express और Times Internet शामिल हैं। याचिका के जरिए एसोसिएशन ने DPDP अधिनियम, 2023 के कई प्रावधानों और DPDP नियम, 2025 के कुछ नियमों को चुनौती दी है।

अब क्या ?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से याचिका पर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई में कानून के प्रावधानों, पत्रकारिता के लिए छूट की मांग और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा तथा प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे। DPDP कानून का उद्देश्य लोगों के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करना है। दूसरी ओर, मीडिया संस्थानों का कहना है कि इस उद्देश्य को पूरा करते हुए पत्रकारिता और सार्वजनिक हित में जानकारी जुटाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय भी जरूरी हैं। इस मामले का फैसला डिजिटल मीडिया, खोजी पत्रकारिता और सूचना के अधिकार से जुड़े भविष्य के कानूनी विमर्श के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने कानून को असंवैधानिक घोषित नहीं किया है और मामले पर अंतिम निर्णय आना बाकी है।

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आकाश सिंह

आकाश सिंह

वरिष्ठ संवाददाता

आकाश सिंह - पिछले करीब 18 वर्षों से राजनीतिक और क्राइम बीट पर सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। इस दौरान जमीनी रिपोर्टिंग, चुनाव कवरेज, प्रशासनिक मुद्दों और संवेदनशील मामलों पर गहराई से काम किया है। साथ ही, पिछले लगभग 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी अनुभव रखते हैं, जहां न्यूज स्क्रिप्ट लेखन, वीडियो कंटेंट निर्माण, वॉइसओवर और सोशल मीडिया के लिए प्रभावी कंटेंट तैयार किया है