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बारामुड़ी खटाल विवाद: गरीबों के आशियाने के लिए मैदान में उतरे पप्पू यादव, हेमंत सोरेन से की हस्तक्षेप की मांग

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धनबाद में 180 से 200 परिवारों पर बेदखली का संकट, सांसद ने खटाल में लोगों के साथ बैठकर खाया खाना; पुनर्वास और रोजगार को लेकर उठाए सवाल

धनबाद: बारामुड़ी खटाल को खाली कराने की प्रशासनिक तैयारी के बीच गरीब पशुपालक परिवारों के समर्थन में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव धनबाद पहुंचे। उन्होंने खटाल में रहने वाले परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके साथ बैठकर भोजन भी किया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले में हस्तक्षेप कर गरीब परिवारों के आशियाने और आजीविका की रक्षा करने की अपील की। बारामुड़ी खटाल में करीब 180 से 200 परिवार रहते हैं। इन परिवारों का कहना है कि वे पिछले दो दशक से अधिक समय से यहां रहकर पशुपालन और दूध के कारोबार के जरिए अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में यदि उन्हें बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाया गया, तो उनके सामने घर और रोजगार दोनों का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

बारामुड़ी खटाल विवाद: गरीबों के आशियाने के लिए मैदान में उतरे पप्पू यादव, हेमंत सोरेन से की हस्तक्षेप की मांग

2005 में प्रशासनिक पहल पर बसाया गया था खटाल

बारामुड़ी खटाल के निवासियों के मुताबिक, उनका यहां बसना किसी निजी निर्णय का परिणाम नहीं था। स्थानीय लोगों का दावा है कि वर्ष 2005 में तत्कालीन उपायुक्त डॉ. बीला राजेश के कार्यकाल में बेकारबांध तालाब के आसपास से पशुपालकों को हटाकर बारामुड़ी में जगह उपलब्ध कराई गई थी।लोगों का कहना है कि उस समय प्रशासन की ओर से रहने और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था भी की गई थी। इसके लिए तालाब खुदवाए जाने का दावा किया जा रहा है। निवासियों के अनुसार, इस संबंध में प्रखंड कार्यालय में पुराने दस्तावेज मौजूद हैं। तब से परिवारों ने यहां अपने घर बनाए और पशुपालन को आजीविका का प्रमुख साधन बनाया। खटाल में यादव समुदाय के साथ आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के परिवार भी रहते हैं।

बेदखली की तैयारी से बढ़ी चिंता

सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का हवाला देते हुए जिला प्रशासन ने बारामुड़ी खटाल को खाली कराने की तैयारी की है। इस खबर के बाद स्थानीय पशुपालकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है।विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यदि जमीन खाली कराना जरूरी है, तो पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि वर्षों से यहां रह रहे परिवारों को अचानक हटाने से उनके बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और दैनिक जीवन पर गंभीर असर पड़ेगा।

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‘गरीब बचाओ, आशियाना बचाओ’ आंदोलन में शामिल हुए सांसद

खटाल खाली कराने के विरोध में स्थानीय पशुपालकों, ओबीसी संगठनों और झामुमो के कुछ नेताओं ने आंदोलन शुरू किया है। इसी क्रम में 4 नवंबर को ‘गरीब बचाओ, आशियाना बचाओ’ अभियान के तहत बारामुड़ी से मेमको मोड़ तक रैली निकाली गई। पप्पू यादव इस आंदोलन के समर्थन में धनबाद पहुंचे। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि गरीब परिवारों को हटाने की कोशिश की जा रही है, जबकि भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने की आशंका भी जताई।

पांच घरों का भोजन कर परिवारों की सुनी पीड़ा

खटाल पहुंचने के दौरान सांसद ने पांच घरों में बनी रोटी और सब्जी खाई। उन्होंने परिवारों की आर्थिक स्थिति और उनकी रोजमर्रा की परेशानियों को समझने की कोशिश की। पप्पू यादव ने कहा कि इन परिवारों का मामला केवल जमीन का विवाद नहीं है। इससे उनकी आजीविका, पशुपालन और वर्षों से बने सामाजिक जीवन का सवाल जुड़ा हुआ है।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि प्रभावित परिवारों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए मानवीय आधार पर निर्णय लिया जाए। सांसद ने दावा किया कि मुख्यमंत्री की ओर से मामले में पहल करने का आश्वासन मिला है।

19 नवंबर तक दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग

पप्पू यादव ने प्रशासन को 19 नवंबर से पहले बारामुड़ी खटाल से संबंधित पुराने दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो वे उपायुक्त कार्यालय के सामने धरना देंगे। जरूरत पड़ने पर धनबाद से रांची तक पैदल मार्च करने की भी बात कही।

प्रशासन का पक्ष: सरकारी जमीन से हटेगा अतिक्रमण

दूसरी ओर, जिला प्रशासन का कहना है कि बारामुड़ी की जमीन सरकारी है और उसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।
उपायुक्त आदित्य रंजन के अनुसार, वर्ष 2005 में जमीन अस्थायी रूप से पशुओं के खटाल के लिए उपलब्ध कराई गई थी। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य लोगों को वहां स्थायी मकान बनाकर बसाना नहीं था। डीसी ने क्षेत्र में अवैध हथियार, गोली और नशे के कारोबार से संबंधित सूचनाएं मिलने की बात भी कही है। प्रशासन के अनुसार, क्षेत्र में सुरक्षा और नियमन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

अब पुनर्वास पर टिकी नजरें

बारामुड़ी खटाल का विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई और गरीब परिवारों के पुनर्वास के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल बन गया है। एक तरफ सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रशासनिक जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ वर्षों से वहां रह रहे परिवारों के घर और रोजगार का मुद्दा है।
अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस मामले में क्या रास्ता निकालती है। क्या प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास और आजीविका की व्यवस्था मिलेगी, या उन्हें बेदखली का सामना करना पड़ेगा? आने वाले दिनों में इस पर सरकार और प्रशासन का फैसला निर्णायक होगा।

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गोविंद मोदक

गोविंद मोदक

रिपोर्टर

पत्रकार | न्यूज़ रिपोर्टर | मीडिया प्रोफेशनल गोविंद मोदक धनबाद, झारखंड के पत्रकार हैं और उन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में लगभग 6 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने अपराध, राजनीति, सामाजिक एवं नागरिक मुद्दों, जनसरोकार और जमीनी स्थानीय खबरों पर रिपोर्टिंग की है। उन्होंने Newz India 24, TV45 Satellite Channel, DHN24, Vande Bharat News, Chanakya News India Jharkhand और Bharatmitra News जैसे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ कार्य किया है। उनकी पत्रकारिता तथ्यपरक, जिम्मेदार और जमीनी रिपोर्टिंग पर केंद्रित है, जिसमें आम लोगों के मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाना शामिल है। मुख्य विशेषज्ञता: अपराध एवं राजनीतिक रिपोर्टिंग • जमीनी पत्रकारिता • सामाजिक एवं नागरिक मुद्दे • जनसरोकार • प्रभावी संवाद एवं नेटवर्किंग