A bridge worth 1.81 crore in a paddy field! Collapsed in the first rain before inauguration.

धान के खेत में 1.81 करोड़ का पुल! उद्घाटन से पहले पहली बारिश में ध्वस्त हुआ गार्डवाल, निर्माण पर उठे गंभीर सवाल

A bridge worth 1.81 crore in a paddy field! Collapsed in the first rain before inauguration.

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

गढ़वा: बिहार के चर्चित “धान के खेत में पुल” विवाद जैसी तस्वीर अब झारखंड के गढ़वा जिले से सामने आई है। जिले के रमकंडा प्रखंड के पतसर गांव में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत करीब 1.81 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पुल उद्घाटन से पहले ही विवादों में आ गया है। पहली ही बारिश में पुल के एप्रोच पथ का गार्डवाल ध्वस्त हो गया, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और पूरी परियोजना की उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

Deoghar
Advertisement

जानकारी के अनुसार, रमकंडा प्रखंड के उदयपुर-चेटे रोड पर पतसर गांव के समीप ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से करीब 25 फीट ऊंचा पुल बनाया गया है। पुल तक पहुंचने के लिए एप्रोच रोड और गार्डवाल का भी निर्माण कराया गया था। हालांकि, पहली ही बारिश में गार्डवाल ढह गया। इसके अलावा एप्रोच रोड को आसपास की जमीन से काफी ऊंचा बनाए जाने को लेकर भी स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है।

RKDF
advertisement

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने के समय से ही उन्होंने पुल की आवश्यकता और निर्माण में तकनीकी खामियों को लेकर कई बार विरोध दर्ज कराया था। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी दी गई थी, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब गार्डवाल गिरने के बाद ग्रामीण निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संभावित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं।

Kashmir
advertisement

गांव के सरपंच ने भी निर्माण कार्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस स्थान पर पुल की कोई विशेष आवश्यकता नहीं थी। उनके अनुसार, यह परियोजना स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नहीं लगती। उन्होंने कहा कि उद्घाटन से पहले ही पहली बारिश में गार्डवाल का ढह जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

कोडरमा में कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट पर पुलिस की कार्रवाई, युवती समेत छह हिरासत में

घटना के बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और संवेदक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, यह मामला एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now