बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर तुष्टीकरण का आरोप: ‘बलात्कारी की मौत पर 3 लाख, कांवरियों के लिए मात्र 1 लाख मुआवजा’
रांची: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार एक बार फिर तुष्टीकरण के आरोपों के घेरे में है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार के हालिया मुआवजा नीति पर सवाल उठाते हुए इसे वोटबैंक की राजनीति का हिस्सा बताया है। मरांडी ने रामगढ़ में आफताब अंसारी की मौत के मामले में सरकार द्वारा घोषित 3 लाख रुपये के मुआवजे की तुलना में बाबा बैजनाथ की पूजा कर लौट रहे कांवरियों की दुर्घटना में मृत्यु पर मात्र 1 लाख रुपये के मुआवजे को असंवेदनशील करार दिया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मरांडी ने अपने बयान में कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने बिना तथ्यों की जांच किए आफताब अंसारी की मौत को मॉब लिंचिंग बताकर 3 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की, जबकि उनके ही विभाग की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना बताया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या स्वास्थ्य मंत्री की डिग्री भी संदेह के घेरे में है। मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार ने वोटबैंक की खातिर तथ्यों को नजरअंदाज कर एक भ्रामक नैरेटिव बनाया।
वहीं, कांवरियों की दुर्घटना में मृत्यु पर सरकार द्वारा केवल 1 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा को मरांडी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट है कि हेमंत सरकार की नजरों में एक कांवरिया का जीवन कितना सस्ता है। यह सरकार तुष्टीकरण की राजनीति में इतनी डूबी है कि इसके हर फैसले में पक्षपात झलकता है।
इस विवाद ने झारखंड में कानून-व्यवस्था और सरकार की मुआवजा नीति पर एक नई बहस छेड़ दी है। मरांडी के बयान ने सत्तारूढ़ गठबंधन पर दबाव बढ़ा दिया है, और जनता के बीच सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

















