बोकारो: होमवर्क न करने पर 3 साल की मासूम की पिटाई, स्कूल प्राचार्य पर गंभीर आरोप
बोकारो: होमवर्क न करने पर 3 साल की मासूम की पिटाई, स्कूल प्राचार्य पर गंभीर आरोप
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बोकारो, 14 दिसंबर : झारखंड के बोकारो जिले में बच्चों के साथ शारीरिक दंड की एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। सेक्टर-8 स्थित किड्स केयर एकेडमी पब्लिक स्कूल में मात्र 3 वर्षीय बच्ची ऋषिका कुमारी को होमवर्क नहीं करने की ‘गलती’ पर प्राचार्य द्वारा कथित रूप से इतनी बुरी तरह पीटा गया कि उसके नन्हे गाल सूज गए। डर के मारे मासूम एक दिन तक खाना भी नहीं खा सकी।
यह घटना उस समय प्रकाश में आई जब बच्ची के पिता ऋषितोष कुमार ने अपनी बेटी का सूजा हुआ चेहरा देखा। गुस्से और दुख से भरे पिता तुरंत स्कूल पहुंचे और मामले की शिकायत की। उन्होंने चास के एसडीओ प्रांजल ढांडा को बच्ची की तस्वीरें भेजकर न्याय की गुहार लगाई। मामला गंभीर होने पर एसडीओ ने मजिस्ट्रेट राजबाला के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की, जो पीड़ित परिवार के घर पहुंची और पूरे मामले की छानबीन की।जांच में पता चला कि बच्ची को जरूरत से ज्यादा पीटा गया था। मजिस्ट्रेट ने चोट के निशानों की पुष्टि की और प्राचार्य ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। प्रशासन ने फिलहाल स्कूल को सुधार का मौका देते हुए सख्त चेतावनी जारी की है।पीड़ित पिता ऋषितोष कुमार का कहना है कि वे पूर्ण न्याय चाहते हैं, लेकिन प्राचार्य के कथित राजनीतिक संबंधों के कारण परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी अभी किताब-कॉपी की दुनिया में कदम रख रही है और होमवर्क का डर उसकी मुस्कान छीन लेगा, यह कैसे सहन किया जाए?”
यह घटना न केवल एक परिवार का दर्द है, बल्कि पूरे समाज के लिए बड़ा सवाल खड़ा करती है—क्या नन्हे-मुन्ने बच्चों को पढ़ाने का तरीका डर और मार-पीट हो सकता है?
भारत में RTE एक्ट 2009 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत स्कूलों में कॉर्पोरल पनिशमेंट पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है ताकि बच्चों का स्कूल सुरक्षित और खुशी का स्थान बना रहे।प्रशासन ने जांच जारी रखने की बात कही है।

















