रांची के कायाकल्प की तैयारी: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की नगर विकास, पथ निर्माण और पर्यटन विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा
रांची के कायाकल्प की तैयारी: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की नगर विकास, पथ निर्माण और पर्यटन विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा
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रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज झारखंड मंत्रालय में राज्य की राजधानी रांची के समग्र विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में नगर विकास एवं आवास विभाग, पथ निर्माण विभाग और पर्यटन विभाग के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि रांची को एक आधुनिक और सुविधायुक्त शहर बनाने के लिए सभी परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।
स्मार्ट सिटी और शहरी बुनियादी ढांचे पर जोर
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने रांची स्मार्ट सिटी परियोजना की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी का लाभ आम नागरिकों को जल्द से जल्द मिलना चाहिए। इसके साथ ही, शहर की ड्रेनेज व्यवस्था, जलापूर्ति और नागरिक सुविधाओं के विस्तार को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए।
सड़कों का सुदृढ़ीकरण और यातायात प्रबंधन
पथ निर्माण विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने राजधानी की सड़कों की स्थिति और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए सड़कों का चौड़ीकरण और नए फ्लाईओवर्स के निर्माण में तेजी लाई जाए, ताकि जनता को जाम से मुक्ति मिल सके।
पर्यटन हब के रूप में विकसित होगी राजधानी
पर्यटन विभाग के साथ चर्चा में हेमंत सोरेन ने रांची और आसपास के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया। मुख्यमंत्री का विजन रांची को न केवल एक प्रशासनिक केंद्र, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी स्थापित करना है।
बैठक की मुख्य बातें:
समयबद्धता: सभी चल रही योजनाओं को डेडलाइन के अंदर पूरा करने का निर्देश।
गुणवत्ता से समझौता नहीं: निर्माण कार्यों में उच्च मानक सुनिश्चित करने की हिदायत।
जन-सुविधा: पार्क, ओपन स्पेस और बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग जैसे नागरिक सुविधाओं पर ध्यान।
समन्वय: विभागों के बीच बेहतर तालमेल के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा,
“हमारी प्राथमिकता है कि रांची के निवासी एक विश्वस्तरीय शहरी परिवेश का अनुभव करें। बुनियादी ढांचे का विकास इस तरह हो कि वह भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सके।”















