दिल्ली कूच: ‘डी-लिस्टिंग’ की मांग को लेकर जमशेदपुर से रवाना हुए 700 से अधिक आदिवासी
नीरज तिवारी
जमशेदपुर: झारखंड के आदिवासी समुदाय में अपनी पहचान और संवैधानिक अधिकारों को लेकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को ‘जनजाति सुरक्षा मंच’ के बैनर तले जमशेदपुर से 700 से अधिक आदिवासी समाज के लोग दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली प्रस्तावित ‘गर्जाना रैली’ में भाग लेने के लिए रवाना हुए।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली के रामलीला मैदान में आगामी 24 मई को एक विशाल जुटान होने जा रहा है, जिसमें पूरे झारखंड से लगभग 5,000 आदिवासी समुदाय के लोग शामिल होंगे। इस रैली का मुख्य एजेंडा ‘डी-लिस्टिंग’ (De-listing) है।
आंदोलनकारियों का तर्क है कि जो आदिवासी अपना धर्म परिवर्तन कर दूसरे धर्म को अपना चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) के तहत आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह आंदोलन उनकी पहचान, अधिकार और संवैधानिक व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए चलाया जा रहा है।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
टाटानगर रेलवे स्टेशन से समुदाय के लोगों को पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रैली में मुख्य वक्ता के रूप में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संघ (RSS) से जुड़े कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। वे इस मंच के माध्यम से केंद्र सरकार तक समाज की मांगों को मजबूती से पहुंचाएंगे।
समाज की मांग
प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि सरकार को डी-लिस्टिंग के विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनकी मांग है कि धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाए, ताकि मूल आदिवासी समुदाय को उनके संवैधानिक हक का पूरा लाभ मिल सके।
रवानगी के दौरान पारंपरिक नारों और उत्साह के साथ आदिवासी समुदाय के लोगों में अपनी संस्कृति और अधिकारों को लेकर एक बड़ा संकल्प देखा गया।
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