Experts from across the country gathered in Jamshedpur for the conservation of rivers and mountains.

नदी और पहाड़ों के संरक्षण के लिए देश भर के विशेषज्ञ जुटे जमशेदपुर में; ‘राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन’ का भव्य आगाज

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Experts from across the country gathered in Jamshedpur for the conservation of rivers and mountains.

नीरज तिवारी

जमशेदपुर: देश की जीवनदायिनी नदियों और पर्यावरण के रक्षक पहाड़ों के संरक्षण के लिए एक ठोस और विशिष्ट कानून बनाने की मांग को लेकर जमशेदपुर में दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन’ का शुक्रवार को भव्य आगाज हुआ। साकची स्थित मोती लाल नेहरू पब्लिक स्कूल में आयोजित इस सम्मेलन में देश भर से आए पर्यावरणविदों, कानून विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक सुर में कहा कि अब समय आ गया है कि प्रकृति के शोषण को रोकने के लिए सख्त कानून बनाए जाएं।

“प्रकृति का शोषण बंद हो” – जलपुरुष राजेंद्र सिंह

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मैग्सेसे पुरस्कार विजेता ‘जलपुरुष’ राजेंद्र सिंह ने अपनी ओजस्वी वाणी से सबको झकझोर दिया। उन्होंने अथर्ववेद के मंत्रों का हवाला देते हुए कहा,
भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्वत मां के स्तन और नदियां मां का रूप हैं। जो प्रकृति को नष्ट कर रहा है, वह स्वयं के विनाश का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।”

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले 77 वर्षों में हमने इंसानी सुविधाओं के लिए तो हजारों कानून बनाए, लेकिन नदियों और पहाड़ों को जीवित रखने के लिए आज तक कोई सुरक्षा कवच (कानून) नहीं तैयार किया गया। उन्होंने ‘विकास’ के नाम पर हो रहे ‘शोषण’ पर तीखा प्रहार किया।

राष्ट्रपति से कानून बनाने की अपील: न्यायमूर्ति वी. गोपाला गौड़ा

सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वी. गोपाला गौड़ा ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नदियां और पहाड़ लुप्त होने के कगार पर हैं। उन्होंने देश की राष्ट्रपति से अपील की कि वे इस गंभीर विषय का संज्ञान लें। उन्होंने सुझाव दिया कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर नदियों और पहाड़ों के संरक्षण हेतु एक राष्ट्रव्यापी कानून पारित किया जाना चाहिए, अन्यथा आने वाली पीढ़ी के लिए जल और पर्यावरण का संकट लाइलाज हो जाएगा।

कानून का ड्राफ्ट तैयार, सुधार की गुंजाइश: सरयू राय

जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने स्थानीय स्तर पर स्वर्णरेखा और खरकई नदी की दुर्दशा का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना सशक्त कानून के पर्यावरण को बचाना असंभव है। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में संरक्षण हेतु एक कानून का ड्राफ्ट पेश किया गया है, जिस पर मंथन जारी है और विशेषज्ञों के सुझावों को शामिल कर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

तकनीकी सत्र में मंथन

सम्मेलन के पहले दिन आयोजित प्रथम तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने वर्तमान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। वक्ताओं ने कहा कि कानून तो बहुत हैं, लेकिन उनकी निगरानी और क्रियान्वयन करने वाली संस्थाएं पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। सारंडा के जंगलों का माइनिंग से हो रहा विनाश और नदियों के प्रदूषित होते जल पर गहरी चिंता जताई गई।

सम्मेलन की मुख्य झलकियां:

युवा शक्ति : सम्मेलन में 300 से अधिक डेलीगेट्स शामिल हुए, जिसमें युवाओं और विद्यार्थियों की बड़ी भागीदारी रही।

पुस्तक विमोचन: कार्यक्रम के दौरान खरकई नदी पर आधारित एक नई पुस्तक का विमोचन किया गया।

आयोजक: यह आयोजन तरुण भारत संघ, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, युगांतर भारती, नेचर फाउंडेशन और जल बिरादरी समेत कई प्रमुख संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है।

समापन: सम्मेलन का दूसरा और अंतिम दिन 23 मई को है, जिसमें भविष्य की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
आयोजकों ने विश्वास जताया है कि जमशेदपुर से उठने वाली यह आवाज नई दिल्ली तक पहुंचेगी और देश में नदी-पर्वत संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक कानून की नींव रखेगी।

 

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