निजी अस्पतालों के साथ उपायुक्त की अहम बैठक, फायर सेफ्टी और मरीजों के अधिकारों पर सख्त निर्देश

रांची : उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में शनिवार को समाहरणालय सभागार में जिले के निजी अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अस्पतालों में फायर सेफ्टी, इलेक्ट्रिकल ऑडिट, मरीजों के अधिकार, अल्ट्रासाउंड सेंटरों की निगरानी और संक्रामक बीमारियों की रिपोर्टिंग जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बैठक में सिविल सर्जन प्रभात कुमार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी-सह-हेल्थ नोडल पदाधिकारी राजेश साहू, आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक समेत विभिन्न निजी अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल ऑडिट पर विशेष जोर
उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी अस्पतालों को फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल सिस्टम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में लगी वायरिंग, मेडिकल इक्यूपमेंट्स, आईसीयू में संचालित एसी और जेनरेटर का नियमित रूप से विशेषज्ञों द्वारा ऑडिट कराया जाए ताकि किसी भी दुर्घटना की संभावना को रोका जा सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शव रोकने पर सख्त चेतावनी
बैठक में मरीजों के शव रोकने की शिकायतों पर उपायुक्त ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पैसे के अभाव में बिल नहीं चुका पाने वाले मरीज के शव को परिजनों को नहीं सौंपना राज्य सरकार के आदेश और क्लिनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट का उल्लंघन है। उन्होंने सभी अस्पतालों को कानून और सरकारी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
अल्ट्रासाउंड सेंटरों को कानून पालन का निर्देश
उपायुक्त ने जिले के सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को लिंग निर्धारण संबंधी कानून का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी सेंटर की संलिप्तता अवैध लिंग जांच में पाई गई तो संबंधित संस्थान और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को अपने निबंधन की वैधता समाप्त होने से पहले नवीकरण के लिए आवेदन करने का निर्देश भी दिया गया।
आयुष्मान योजना भुगतान की समीक्षा
बैठक में प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत अस्पतालों को होने वाले भुगतान की समीक्षा भी की गई। उपायुक्त ने अस्पतालों को स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन के अनुसार कार्य करने का निर्देश देते हुए कहा कि निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों का एफिलिएशन रद्द किया जा सकता है।
डेंगू, मलेरिया और टीबी मरीजों की समय पर सूचना देने का निर्देश
उपायुक्त ने सभी अस्पतालों को डेंगू, मलेरिया, टीबी और अन्य संक्रामक बीमारियों से संबंधित मरीजों की जानकारी समय पर स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि बीमारी की रोकथाम के लिए त्वरित कार्रवाई की जा सके।
इसके अलावा अस्पतालों को बायो मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल के नियमों का पालन करने, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के प्रमाणपत्रों की नियमित जांच करने तथा मरीजों और उनके परिजनों के साथ संवेदनशील और शालीन व्यवहार बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।

















