धनबाद : आधार ने मिलाया बिछड़े माँ बेटे को ..दो साल बाद मां की गोद में लौटा बेटा
धनबाद : कभी-कभी किसी पहचान संख्या के पीछे सिर्फ कुछ अंक नहीं होते, बल्कि किसी परिवार की पूरी उम्मीद छिपी होती है। धनबाद में आधार के इन्हीं अंकों ने दो साल से बिछड़े एक मां-बेटे को फिर आमने-सामने ला दिया।
मंगलवार को धनबाद बाल कल्याण समिति (CWC) के कार्यालय में वह पल आया, जिसका इंतजार एक मां ने शायद उम्मीद छोड़कर भी किया होगा। वृंदावन से धनबाद पहुंची मां की नजर जैसे ही अपने बेटे पर पड़ी, वह उसे सीने से लगाने के लिए दौड़ पड़ी। दो साल की दूरी एक पल में खत्म हो गई। मां की आंखों से आंसू बह रहे थे और बेटा मां की गोद में मुस्कुरा रहा था।
यह सिर्फ एक बच्चे के घर लौटने की कहानी नहीं है। यह उस तकनीक की कहानी भी है, जिसने एक अनजान बच्चे की पहचान को उसकी मां तक पहुंचने का रास्ता बना दिया।
ट्रेन से धनबाद पहुंचा था मासूम
कहानी 13 सितंबर 2024 से शुरू होती है। करीब छह साल का यह बच्चा भटकते हुए ट्रेन पर सवार होकर धनबाद पहुंच गया था। धनबाद रेल पुलिस की नजर उस पर पड़ी तो उसे सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया और बाद में बाल संरक्षण केंद्र में रखा गया।
बच्चे से उसके परिवार के बारे में जानकारी लेने की कोशिश हुई। शुरुआती जांच में उसका संबंध मुरादाबाद से सामने आया। परिवार की तलाश की गई, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा।
दिन बीतते गए। बच्चा बाल संरक्षण केंद्र में रहा और दूसरी ओर CWC की कोशिशें जारी रहीं कि किसी तरह उसके परिवार तक पहुंचा जा सके।
जब आधार नंबर बना मां तक पहुंचने की चाबी
परिवार की तलाश में एक अहम कदम उठाया गया—बच्चे के आधार रिकॉर्ड का सत्यापन।
यहीं से कहानी ने करवट ली।
आधार से मिली जानकारी में बच्चे की मां से संबंधित मोबाइल नंबर और मध्य प्रदेश के मुरैना का पता सामने आया। नंबर पर संपर्क किया गया तो पता चला कि परिवार अब रोजगार के सिलसिले में वृंदावन, मथुरा में रह रहा है।
एक मोबाइल नंबर, एक पहचान और कुछ सत्यापन की प्रक्रिया ने दो साल से बंद पड़े मां-बेटे के मिलन का दरवाजा खोल दिया।
CWC सदस्य ममता अरोड़ा के मुताबिक, स्थानीय पार्षद और अन्य लोगों की मदद से महिला तक संपर्क पहुंचाया गया। वीडियो कॉल के जरिए मां और बच्चे की पहचान की पुष्टि की गई। इसके बाद भी प्रक्रिया पूरी करने के लिए महिला के आवासीय पते का सत्यापन कराया गया।
कागजी प्रक्रिया के पीछे छिपी थी मां की बेचैनी
बच्चे को उसकी मां को सौंपना सिर्फ भावनाओं का मामला नहीं था। बाल संरक्षण से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया का पालन भी जरूरी था। वृंदावन में महिला के स्पष्ट आवासीय पते को लेकर अड़चन थी। धनबाद CWC ने स्थानीय पार्षद और वहां की CWC की मदद से पते का सत्यापन कराया।
जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आखिरकार वह दिन आया, जब बच्चा अपनी मां के सामने था। दो साल का इंतजार एक गले में सिमट गया
मां ने बेटे को देखा और सीने से लगा लिया।
जिस बच्चे को दो साल पहले शायद यह भी पता नहीं था कि वह अपने घर से कितनी दूर आ गया है, वह फिर अपनी मां की गोद में था। मां के लिए यह सिर्फ बेटे की वापसी नहीं थी—यह दो साल से अधूरी जिंदगी के एक हिस्से के वापस आने जैसा था।
कार्यालय में मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
इस कहानी में रेल पुलिस की सतर्कता, CWC की लगातार कोशिश और स्थानीय लोगों का सहयोग अपनी जगह महत्वपूर्ण है। लेकिन इस पूरे प्रयास में आधार की पहचान संबंधी जानकारी वह कड़ी बनी, जिसने बिखरे हुए सुरागों को बच्चे की मां तक पहुंचने का रास्ता दिया।
अब बच्चे के भविष्य की भी होगी चिंता
CWC के अनुसार बच्चे के पिता का निधन हो चुका है। ऐसे में परिवार को उपलब्ध सरकारी सहायता और पुनर्वास योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। परिवार को स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ दिलाने की दिशा में भी पहल की जाएगी, ताकि बच्चे की पढ़ाई और पालन-पोषण में आर्थिक मदद मिल सके।
धनबाद की यह कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि यहां एक आधार नंबर महज पहचान का दस्तावेज नहीं रहा। उसके पीछे दर्ज जानकारी ने एक बच्चे को उसकी मां तक पहुंचाने में मदद की और एक मां को वह दिया, जिसका इंतजार शायद उसने दो साल तक हर दरवाजे पर किया था।
कुछ अंक कागज पर लिखे होते हैं, लेकिन कभी-कभी वही अंक किसी मां की गोद तक पहुंचने का रास्ता बन जाते हैं।

















