रांची दूसरे दिन भी बुलडोजर एक्शन, विरोध में सड़क पर उतरे सैकड़ों लोग; DPS चौक पर जाम
अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन-नगर निगम की टीम का विरोध, बिरसा चौक-हरमू बाईपास पर स्कूल बसों समेत सैकड़ों वाहन फंसे
रांची। राजधानी रांची के एचईसी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जिला प्रशासन और रांची नगर निगम की टीम ने बुधवार को दूसरे दिन भी भारी पुलिस बल के साथ एचईसी क्षेत्र में कथित अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी। जैसे ही बुलडोजर लेकर टीम मौके पर पहुंची, स्थानीय बस्तीवासियों और विस्थापित परिवारों का विरोध तेज हो गया।
महिलाओं, पुरुषों और बच्चों समेत बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी करते हुए सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों के सड़क पर उतरने से बिरसा चौक-हरमू बाईपास रोड पर डीपीएस चौक के पास भीषण जाम लग गया। स्कूल बसों समेत सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन जाम में फंस गए।

आखिर क्या है पूरा मामला?
दरअसल, एचईसी की जमीन पर लंबे समय से अतिक्रमण और अवैध निर्माण का मामला सामने आता रहा है। एचईसी प्रबंधन की ओर से समय-समय पर परिसर की जमीन पर अनधिकृत निर्माण और कब्जे को लेकर चेतावनी जारी की गई है। प्रबंधन का कहना है कि उसकी जमीन पर बिना अनुमति निर्माण करना और ऐसे निर्माण की खरीद-बिक्री करना नियमों के खिलाफ है।
पिछले कुछ महीनों में एचईसी ने अपनी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया तेज की है। अगस्त में प्रबंधन की ओर से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, स्कूल, कॉलेज और पेट्रोल पंप आदि की जमीन की भी पैमाइश शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई थी। साथ ही अतिक्रमित जमीन की पहचान और उसे वापस लेने की कवायद तेज हुई।
इसी कार्रवाई की कड़ी में अब एचईसी क्षेत्र की बस्तियों में बने कथित अवैध निर्माणों को हटाया जा रहा है।
बस्तीवासी क्यों कर रहे हैं विरोध?
कार्रवाई का विरोध कर रहे बस्तीवासियों का कहना है कि कई परिवार लंबे समय से यहां रह रहे हैं और उनके सामने अचानक घर उजड़ने का संकट खड़ा हो गया है। बस्ती बचाओ संघर्ष समिति इस कार्रवाई को रोकने और बस्तियों के नियमितीकरण तथा लोगों को मालिकाना हक देने की मांग कर रही है। समिति ने इस मुद्दे को लेकर आंदोलन भी शुरू किया है।
सितंबर की शुरुआत में समिति की ओर से एचईसी क्षेत्र की बस्तियों को हटाने के विरोध में आंदोलन की घोषणा की गई थी। 13 सितंबर को बस्तीवासियों ने एचईसी मुख्यालय की ओर प्रदर्शन भी किया और प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई रोकने की मांग की थी। प्रदर्शनकारियों ने बस्ती उजाड़ने और सड़क निर्माण/सुंदरीकरण के नाम पर लोगों को हटाने का आरोप लगाया।

मंगलवार को शुरू हुई कार्रवाई के बाद बढ़ा तनाव
मंगलवार को जिला प्रशासन और नगर निगम की टीम एचईसी बाईपास क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान कई निर्माण गिराए गए। स्थानीय लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया और आरोप लगाया कि उन्हें पर्याप्त सूचना नहीं दी गई थी। प्रशासन की कार्रवाई के दौरान विरोध और सड़क जाम की स्थिति भी बनी।मंगलवार की कार्रवाई में करीब 40 परिवारों के विस्थापित हुए है।
बुधवार को फिर सड़क पर उतरे लोग
बुधवार को जब कार्रवाई दोबारा शुरू हुई तो विरोध और तेज हो गया। बड़ी संख्या में लोग डीपीएस चौक के आसपास सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों के सड़क पर आने से यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।
बिरसा चौक से हरमू बाईपास की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई स्कूल बसें भी जाम में फंस गईं। इससे स्कूली बच्चों और आम यात्रियों को काफी परेशानी हुई।
मौके पर मौजूद पुलिस बल प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने और यातायात सामान्य कराने का प्रयास कर रहा है। प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी है, जबकि बस्तीवासी कार्रवाई रोकने की मांग पर अड़े हैं।

एक तरफ जमीन बचाने की कार्रवाई, दूसरी तरफ आशियाना बचाने की मांग
एचईसी की जमीन पर बढ़ते अवैध कब्जे को लेकर पिछले महीनों में लगातार सवाल उठते रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार कंपनी की आर्थिक स्थिति और जमीन की निगरानी में दिक्कतों के बीच कई जगहों पर अवैध निर्माण बढ़े हैं। कुछ जगहों पर खाली जमीन पर मकान, दुकान और व्यावसायिक निर्माण तक किए जाने की बात सामने आई है।
अब एचईसी प्रबंधन अपनी जमीन वापस लेने की प्रक्रिया तेज कर रहा है। दूसरी ओर, प्रभावित बस्तीवासी नियमितीकरण, मालिकाना हक और पुनर्वास जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
यही वजह है कि एचईसी की जमीन से अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई अब जमीन के मालिकाना हक और बस्तीवासियों के भविष्य से जुड़ा बड़ा विवाद बन गई है।
















