With no road access, a mat became the makeshift stretcher; villagers struggled immensely to rush an unconscious teenage girl to the hospital.

सड़क नहीं तो चटाई बनी ‘सहारा’, अचेत किशोरी को अस्पताल पहुंचाने में ग्रामीणों के छूटे पसीने

With no road access, a mat became the makeshift stretcher; villagers struggled immensely to rush an unconscious teenage girl to the hospital.
With no road access, a mat became the makeshift stretcher; villagers struggled immensely to rush an unconscious teenage girl to the hospital.

संजय/शंभू कुमार सिंह

सिमडेगा: डिजिटल दौर में जहां गांवों तक इंटरनेट और तकनीक की पहुंच बढ़ रही है, वहीं सिमडेगा के सुदूर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अब भी चिंताजनक है। जलडेगा प्रखंड के पतिअम्बा पंचायत स्थित मड़की टोली गांव की एक घटना ने सड़क सुविधा की जमीनी हकीकत सामने ला दी है। गांव में सड़क के अभाव के कारण अचेत हुई 14 वर्षीय किशोरी को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को चटाई को ही अस्थायी स्ट्रेचर बनाना पड़ा।

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बताया गया कि किशोरी की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह अचेत हो गई। उसे तत्काल अस्पताल ले जाना जरूरी था, लेकिन गांव तक पक्की और सुगम सड़क नहीं होने के कारण वाहन पहुंचने में परेशानी हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने चटाई पर किशोरी को लिटाया और उसे पैदल मुख्य सड़क तक लेकर पहुंचे, ताकि वहां से अस्पताल ले जाया जा सके।

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ग्रामीणों के अनुसार, मड़की टोली में सड़क की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। गांव में करीब 100 परिवार रहते हैं और आबादी 500 से 700 के बीच बताई जाती है। सामान्य दिनों में ग्रामीण किसी तरह आवागमन कर लेते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में रास्ते की स्थिति खराब हो जाने से परेशानी काफी बढ़ जाती है।

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सबसे अधिक दिक्कत आपात स्थिति में होती है। किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने, दुर्घटना होने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाने के कारण मरीज को पहले पैदल मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है।

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ग्रामीणों का कहना है कि झारखंड गठन के करीब 26 वर्ष बाद भी मड़की टोली जैसे गांवों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव तक पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग की है।

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ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से रोजमर्रा का आवागमन आसान होने के साथ-साथ आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी संभव हो सकेगा। किशोरी को चटाई पर ले जाने की तस्वीर ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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Drishti Now

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वरिष्ठ संवाददाता

झारखंड की राजनीति, प्रशासन और स्थानीय खबरों पर लंबे समय से रिपोर्टिंग कर रहे हैं।