First expansion of Samrat cabinet, 30+ ministers may take oath

सम्राट मंत्रिमंडल का पहला विस्तार, 30+ मंत्री ले सकते हैं शपथ, ऐतिहासिक गांधी मैदान में भव्य आयोजन

First expansion of Samrat cabinet, 30+ ministers may take oath

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पटना : बिहार की सियासत के लिए आज का दिन अहम माना जा रहा है। सम्राट मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में 30 से अधिक मंत्रियों को शामिल किए जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े नेता शामिल होंगे।

बड़े नेताओं का जमावड़ा
इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई दिग्गज मौजूद रहेंगे। वहीं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी भी समारोह में शामिल होंगे।

तीन हेलीपैड और हाई-सिक्योरिटी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन को लेकर विशेष तैयारी की गई है। वे नई दिल्ली से पटना एयरपोर्ट पहुंचने के बाद हेलीकॉप्टर से गांधी मैदान आएंगे। इसके लिए मैदान में तीन हेलीपैड बनाए गए हैं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

भाजपा-जदयू में मंत्री पदों का बंटवारा
सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल सैयद अता हसनैन भाजपा के 15 और जदयू के 14 मंत्रियों को शपथ दिला सकते हैं। पहले से सरकार में शामिल दो उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव को मिलाकर जदयू के मंत्रियों की संख्या 16 हो जाएगी।

सहयोगी दलों को भी मिलेगा मौका
एनडीए के अन्य सहयोगी दलों को भी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। लोजपा (रामविलास) को 2 मंत्री पद। हम (HAM) को 1 मंत्री पद और रालोमो को 1 मंत्री पद दिया जा सकता है।

संभावित नामों की चर्चा तेज
जदयू कोटे से जिन नेताओं के नाम चर्चा में हैं, उनमें डॉ. अशोक चौधरी, श्रवण कुमार, लेशी सिंह, मदन सहनी, सुनील कुमार, मो. जमा खान समेत कई नाम शामिल हैं। वहीं भाजपा कोटे से विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय, डॉ. दिलीप जायसवाल, नीतीश मिश्रा, रामकृपाल यादव और श्रेयसी सिंह जैसे नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है।

सूत्रों की मानें तो इस विस्तार में चार मंत्री पद खाली रखे जा सकते हैं, जिन्हें दूसरे चरण में भरा जाएगा। मई के अंतिम सप्ताह में विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव के बाद एक और कैबिनेट विस्तार होने की संभावना है। नजरें के शपथ ग्रहण पर टिकी हैं, जहां से बिहार की नई राजनीतिक दिशा तय होने के संकेत मिल सकते हैं।

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