झारखंड CCTV टेंडर घोटाला: बाबूलाल मरांडी का CM को पत्र, ‘शराब घोटाले’ जैसा खेल!
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड थानों में CCTV टेंडर में बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने टाटा एडवांस सिस्टम और सिंडिकेट की मिलीभगत पर CM को पत्र लिख कार्रवाई की मांग की।
माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार राज्य के सभी थानों में CCTV कैमरा लगाने की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और अनियमितता की आशंका सामने आ रही है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!विभाग में कार्यरत पूजा सिंघल जैसे भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा CCTV टेंडर को पहले निरस्त किया गया और फिर कथित रूप से कुछ चुनिंदा कंपनियों… pic.twitter.com/ox5ycyRwhd
— Babulal Marandi (@yourBabulal) May 7, 2026
रांची: झारखंड के थानों में सीसीटीवी (CCTV) लगाने की योजना विवादों के घेरे में आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर इस पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। मरांडी ने चेतावनी दी है कि यह पूरा खेल ‘शराब घोटाले’ की तर्ज पर एक खास सिंडिकेट को फायदा पहुँचाने के लिए रचा गया है।
“जो जितना बड़ा भ्रष्टाचारी, वो उतना बड़ा अधिकारी”
मरांडी ने अपने पत्र में तीखे प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में अधिकारियों की पदस्थापना का फॉर्मूला ही भ्रष्टाचार पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि टाटा एडवांस सिस्टम और एक सिंडिकेट मिलकर इस टेंडर को हथियाने की तैयारी में है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस विभाग में पूजा सिंघल जैसी अधिकारी रही हों, वहाँ पारदर्शिता की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
पुराने टेंडर रद्द कर ‘चहेतों’ के लिए नई राह
पत्र के अनुसार, पुरानी निविदा को बिना ठोस आधार के निरस्त कर दिया गया और नई निविदा (RFP) की शर्तें इस तरह बनाई गई हैं कि केवल कुछ चुनिंदा कंपनियां ही इसमें शामिल हो सकें। मरांडी ने **सूचना तकनीकी विभाग के पत्रांक संख्या IT/CCTV/POL/1/2025** का हवाला देते हुए कहा कि संयुक्त सचिव ने खुद सीईओ JAPIT पर लगे आरोपों को गंभीर माना है।
टेंडर की शर्तों में हेरफेर के 7 बड़े सबूत:
बाबूलाल मरांडी ने तकनीकी समिति की रिपोर्ट को दरकिनार कर ‘दलालों’ के निर्देश पर बनाए गए टेंडर के 7 मुख्य बिंदुओं को उजागर किया है: जिसे पांच बिंदु मुख्य है
1. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना:
2MP कैमरे के टेंडर में रिकॉर्डिंग मानक 1MP (720P) रखा गया है, जो नियमों के खिलाफ है।
2. अनुभव की गलत शर्त:
टेंडर विकेंद्रीकृत स्थापना का है, लेकिन अनुभव ‘कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ का मांगा गया है।
3. OEM पक्षपात:
कैमरे और UPS के मापदंड केवल 2 खास कंपनियों को लाभ पहुँचाने के लिए सेट किए गए हैं।
4. चीन कनेक्शन पर चुप्पी:
साइबर सुरक्षा नियमों के बावजूद चीनी निवेश वाली कंपनियों को अयोग्य नहीं ठहराया जा रहा है।
5. संविदा कर्मियों का शोषण:
कर्मचारियों को धमकी दी जा रही है कि यदि उन्होंने इस फाइल का विरोध किया तो उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी।
मरांडी ने मुख्यमंत्री को आगाह करते हुए कहा, *”मैंने शराब घोटाले से पहले भी आपको आगाह किया था, लेकिन आपने संज्ञान नहीं लिया। अब फिर वही इतिहास दोहराया जा रहा है। यदि आपने तुरंत निविदा रद्द कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की, तो भ्रष्टाचार की लपटें फिर आप तक पहुँच सकती हैं।”
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार राज्य के सभी थानों में सीसीटीवी लगाना सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए अनिवार्य है। लेकिन यदि इसके उपकरण और स्थापना में ही ‘सिंडिकेट’ का प्रवेश हो जाए, तो राज्य की सुरक्षा प्रणाली और जनता के पैसे, दोनों के साथ खिलवाड़ होगा।
















