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हिंदी दिवस 2025: रांची में हिंदी साहित्य भारती ने आयोजित की विचार गोष्ठी

रांची : हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी साहित्य भारती के तत्वावधान में रांची के उड़ान एकेडमी प्रांगण में एक भव्य विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी साहित्य भारती झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय राय ने की, जबकि प्रख्यात साहित्यकार डॉ. जग बहादुर पांडे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

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हिंदी भाषा और साहित्य पर गहन विमर्श

विचार गोष्ठी में हिंदी भाषा और साहित्य की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और अस्मिता की धरोहर है। उन्होंने हिंदी को शिक्षा, प्रशासन और व्यवसाय के क्षेत्रों में सशक्त रूप से स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

हिंदी को कार्यक्षेत्र की भाषा बनाएं: अजय राय

अध्यक्षीय संबोधन में अजय राय ने कहा, “हिंदी दिवस केवल औपचारिकता का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीकी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के युग में हिंदी अपनी मजबूती बनाए रखे।” उन्होंने हिंदी को घर तक सीमित न रखकर कार्यक्षेत्र और व्यवसाय की भाषा बनाने की अपील की।

साहित्य समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम: डॉ. पांडे

मुख्य अतिथि डॉ. जग बहादुर पांडे ने हिंदी की अभिव्यक्ति क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि साहित्यिक सृजन समाज परिवर्तन का प्रभावी साधन है। उन्होंने युवाओं से हिंदी लेखन और पठन को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आग्रह किया।

वक्ताओं ने रखे विचार

कार्यक्रम में डॉ. बासुदेव प्रसाद, डॉ. अभिषेक, अरुण अग्रवाल, सुकुमार झा, डॉ. ममता, त्रिपुरेश्वर मिश्रा और डॉ. अंजेश ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने नई पीढ़ी पर हिंदी की समृद्धि और प्रसार की जिम्मेदारी सौंपी और डिजिटल व तकनीकी माध्यमों के जरिए भाषा को सशक्त करने पर जोर दिया।

हिंदी जागरूकता अभियान की घोषणा

कार्यक्रम के अंत में हिंदी साहित्य भारती ने संकल्प लिया कि आगामी वर्ष में झारखंड के विभिन्न जिलों में “हिंदी जागरूकता अभियान” चलाया जाएगा। इसके तहत गोष्ठियां, कवि सम्मेलन और कार्यशालाएं आयोजित होंगी। साथ ही, डिजिटल मंचों पर हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष पहल की जाएगी।

कार्यक्रम का संचालन रांची इकाई के अध्यक्ष बलराम पाठक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अरुण अग्रवाल ने दिया। इस अवसर पर साहित्यकारों, शिक्षाविदों, छात्र-छात्राओं और हिंदी प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कार्यक्रम का आयोजन हिंदी साहित्य भारती रांची इकाई ने सफलतापूर्वक किया।

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