झारखण्ड की ऐतिहासिक वैश्विक उपस्थिति: विश्व आर्थिक मंच (दावोस 2026) में पहली बार भागीदारी

झारखण्ड की ऐतिहासिक वैश्विक उपस्थिति: विश्व आर्थिक मंच (दावोस 2026) में पहली बार भागीदारी

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रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड पहली बार विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum – WEF) की वार्षिक बैठक में भाग ले रहा है। यह भागीदारी राज्य के 25 वर्ष पूरे होने के साथ-साथ भारत के लिए एक महत्वपूर्ण टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। दावोस में 19 से 23 जनवरी 2026 तक होने वाली इस बैठक में मुख्यमंत्री एक 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।

झारखण्ड, जो कोयला, लौह अयस्क, तांबा, यूरेनियम और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे खनिजों का विशाल भंडार रखता है, वैश्विक मंच पर अपने संसाधनों को न केवल कच्चे माल के रूप में बल्कि उत्तरदायी खनन, मूल्यवर्धित उद्योगों, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास की आपूर्ति श्रृंखला के पार्टनर के रूप में पेश करेगा। राज्य की “प्रकृति के साथ सामंजस्य में विकास” की सोच WEF के सतत विकास और दीर्घकालिक परिवर्तन के एजेंडे से पूरी तरह मेल खाती है।

मुख्य बिंदु:

ऐतिहासिक पहली भागीदारी : राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने पर यह पहला अवसर है जब झारखण्ड WEF में प्रतिनिधित्व कर रहा है।

वैश्विक निवेश और साझेदारी : वैश्विक निवेशकों, स्वच्छ ऊर्जा विशेषज्ञों, वित्तीय संस्थानों और प्रौद्योगिकी कंपनियों से सीधा संवाद होगा।

आदिवासी विरासत का प्रदर्शन : झारखण्ड अपनी जीवंत मेगालिथिक संस्कृति (प्राचीन पत्थर संरचनाएं, गुफा चित्र और आदिवासी परंपराएं) को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगा, जो UNESCO विश्व धरोहर की दिशा में भी कदम हो सकता है।

दावोस के बाद यूके दौरा : बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल यूनाइटेड किंगडम जाएगी, जहां मुख्यमंत्री ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में विशेष व्याख्यान देंगे।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि यह भागीदारी महज संवाद नहीं, बल्कि भारत और विश्व के विकास की अगली कहानी को आकार देने का अवसर है। झारखण्ड अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है – जहां खनिज संपदा, समृद्ध पारिस्थितिकी और आदिवासी संस्कृति मिलकर सतत एवं समावेशी विकास का नया मॉडल पेश करेंगे।

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