झामुमो ने रघुवर दास के आरोपों को किया खारिज, कॉरपोरेटपरस्ती और भ्रष्टाचार का लगाया जवाबी आरोप
रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा वर्तमान राज्य सरकार पर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। झामुमो महासचिव व प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने रघुवर दास पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए ग्राम सभाओं को दरकिनार किया और आदिवासियों, दलितों व पिछड़ों के अधिकारों को कुचला।
विनोद पांडेय ने कहा, “रघुवर दास को पहले अपने कार्यकाल के भ्रष्टाचार, सीएनटी-एसपीटी एक्ट के उल्लंघन और कॉरपोरेटपरस्त नीतियों का हिसाब देना चाहिए।” उन्होंने सवाल उठाया कि रघुवर सरकार में पेसा कानून को लागू करने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? खनिज संसाधनों की लूट और ग्राम सभाओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पांडेय ने कहा कि रघुवर दास को बताना चाहिए कि उनके शासनकाल में कितनी ग्राम सभाओं से राय लेकर खनन पट्टे दिए गए।
विनोद पांडेय ने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार पेसा नियमावली को लागू करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। विभिन्न विभागों से सुझाव लेकर इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि झामुमो सरकार आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
नगर निकाय चुनाव को लेकर भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए पांडेय ने कहा कि भाजपा की नीयत कभी भी पिछड़े वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने की नहीं रही। उन्होंने कहा कि ट्रिपल टेस्ट के बिना चुनाव कराने का दबाव बनाना भाजपा के पिछड़ा विरोधी चेहरे को उजागर करता है। हेमंत सरकार ने अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए सभी वर्गों को न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए हैं।
विनोद पांडेय ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को अपनी नीति और रणनीति में बदलाव लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “अगर भाजपा नेताओं को रणनीति बनाने का विवेक नहीं है, तो वे झामुमो से मदद मांग सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड की जनता अब भाजपा के दुष्प्रचार में नहीं फंसने वाली। जनता ने देखा है कि कैसे भाजपा सरकार ने उनके अधिकारों को दबाया, जबकि झामुमो सरकार उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है।
विनोद पांडेय ने रघुवर दास पर निशाना साधते हुए कहा कि दलालों और विदेशी ताकतों के साथ काम करने का आरोप लगाने से पहले उन्हें अपने कार्यकाल की खामियों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने भी कई बार रघुवर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे।















