कोडरमा में हाथियों का तांडव: मजदूर और बच्चे की दर्दनाक मौत, 3 घायल, 27 दिनों में 7 की जान गई

कोडरमा में हाथियों का तांडव: मजदूर और बच्चे की दर्दनाक मौत, 3 घायल, 27 दिनों में 7 की जान गई

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कोडरमा : झारखंड के कोडरमा जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला जयनगर थाना क्षेत्र के कंझियाडीह गांव का है, जहां बीती रात हाथियों के झुंड ने ईंट भट्टे पर हमला कर दिया। इस दर्दनाक घटना में एक मजदूर और एक 12 वर्षीय बच्चे की कुचलकर मौत हो गई, जबकि तीन लोग घायल हो गए।

मृतकों की पहचान बिहार के फतेहपुर गांव निवासी 32 वर्षीय राजकुमार मांझी और 12 वर्षीय लवकुश मांझी के रूप में हुई है। वहीं घायल होने वालों में राजकुमार मांझी की पत्नी गौरी देवी, लवकुश मांझी की मां कारी देवी और उनका डेढ़ वर्षीय पुत्र शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार, बीती रात हाथियों का झुंड कंझियाडीह स्थित ईंट भट्टे पर पहुंचा और वहां बने मिट्टी के घरों को तोड़ना शुरू कर दिया। अचानक हुए हमले से मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई और सभी अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। इसी दौरान एक छोटा बच्चा झोपड़ी में फंस गया, जिसे बचाने के प्रयास में हाथियों ने हमला कर दिया। वहीं 12 वर्षीय लवकुश भागते-भागते हाथियों के झुंड के बीच पहुंच गया, जहां उसे सूंड से पटक-पटक कर मार डाला गया। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बच्चे का शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया।

घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोग वन विभाग के खिलाफ आक्रोशित हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 27 दिनों में हाथियों ने अब तक 7 लोगों की जान ले ली है, जबकि आधा दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि वन विभाग द्वारा खदेड़े जाने के बाद हाथियों का झुंड कभी जयनगर, कभी डोमचांच तो कभी कोडरमा घाटी के जंगलों में पहुंच जाता है। दिन में जंगलों में रहने के बाद रात में ये रिहायशी इलाकों में घुसकर नुकसान पहुंचा रहे हैं।

डीएफओ सौमित्र शुक्ला ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि हाथियों को क्षेत्र से बाहर खदेड़ने के प्रयास लगातार जारी हैं। इसके लिए पश्चिम बंगाल से विशेष टीम भी बुलाई गई है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे जंगल क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें, हाथियों के पास न जाएं और कुछ दिनों तक खुले में सोने से बचें।

लगातार हो रही घटनाओं ने प्रशासन और वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। वहीं ग्रामीणों में डर के साथ-साथ गुस्सा भी बढ़ता जा रहा है। जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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