झारखंड: ग्रामीण कार्य विभाग में ‘पत्र घोटाले’ पर बवाल, भाजपा ने की फॉरेंसिक जांच की मांग
झारखंड ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर घोटाले को लेकर भाजपा ने ‘पत्र घोटाले’ का आरोप लगाया है। प्रवक्ता अजय साह ने दो पत्रों के रहस्य पर फॉरेंसिक जांच और बबलू मिश्रा की भूमिका की जांच की मांग की है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

रांची: झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर प्रक्रिया और अधिकारियों पर दबाव को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार पर टेंडर घोटाले को दबाने के लिए ‘पत्र घोटाला’ करने का गंभीर आरोप लगाया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
अजय साह के अनुसार, विवाद की शुरुआत 23 अप्रैल को हुई जब ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंताओं की ओर से कथित तौर पर एक पत्र जारी किया गया। इस पत्र में आरोप लगाया गया था कि बबलू मिश्रा नामक एक व्यक्ति सरकारी अभियंताओं को लगातार डरा-धमका रहा है और टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। यह पत्र कई दिनों तक विभागीय गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना रहा।
नेता प्रतिपक्ष के हस्तक्षेप के बाद आया ‘यू-टर्न’
मामले में नाटकीय मोड़ 4 मई 2026 को आया। भाजपा के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा और जांच की मांग की। भाजपा का आरोप है कि जैसे ही मामला राजनीतिक रूप से गरमाया, उसी दिन अभियंताओं की ओर से एक दूसरा पत्र सामने आया, जिसमें पिछले (23 अप्रैल वाले) पत्र को पूरी तरह फर्जी करार दे दिया गया।
भाजपा के तीखे सवाल और मांगें
भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
पत्रों की सत्यता: दोनों पत्रों की फॉरेंसिक जांच हो ताकि स्पष्ट हो सके कि वास्तव में फर्जी कौन सा है।
10 दिनों की चुप्पी: अगर 23 अप्रैल का पत्र फर्जी था, तो विभाग और अभियंताओं ने 4 मई तक (नेता प्रतिपक्ष के पत्र लिखने तक) इस पर कोई सफाई क्यों नहीं दी?
दबाव की जांच: क्या अभियंताओं पर सत्ता का दबाव बनाकर उनसे जबरन दूसरा पत्र लिखवाया गया और बयान बदलवाया गया?
बबलू मिश्रा की भूमिका: पत्र में नामित व्यक्ति बबलू मिश्रा की पहचान और सरकारी कार्यों में उनके हस्तक्षेप की उच्चस्तरीय जांच हो।
“यह मामला केवल प्रशासनिक चूक का नहीं, बल्कि राज्य की टेंडर प्रक्रिया में गहरी पैठ बना चुके भ्रष्टाचार और अधिकारियों की सुरक्षा से जुड़ा है। सच सामने आना ही चाहिए।” — अजय साह, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा
BJP ने स्पष्ट किया है कि टेंडर घोटाले को छिपाने के लिए पत्रों का यह खेल खेला जा रहा है। अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है कि वह इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए जाते हैं।
















