पाकुड़ : न्यू फरक्का में ट्रैक धंसा, पाकुड़ होकर चलने वाली कई ट्रेनें रद्द, कई का बदला रूट
पाकुड़। पश्चिम बंगाल में लगातार हो रही भारी बारिश ने रेल परिचालन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मालदा डिवीजन में न्यू फरक्का और तीलडांगा के बीच रेलवे ट्रैक के नीचे की जमीन धंसने के कारण उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के बीच रेल सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर पाकुड़ रेलवे स्टेशन से होकर गुजरने वाली ट्रेनों पर भी पड़ा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रेलवे के मुताबिक, न्यू फरक्का के पास ट्रैक के नीचे मिट्टी धंसने की घटना लगातार भारी बारिश के कारण हुई। पानी के रिसाव और ट्रैक के किनारे मौजूद जलस्रोत से मिट्टी के कटाव ने स्थिति को और गंभीर कर दिया। मरम्मत के दौरान भी दोबारा जमीन धंसने से रेलवे को परिचालन में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।

5 सितंबर को भी कई ट्रेनें प्रभावित
ट्रैक धंसने के कारण 5 सितंबर को भी कई लंबी दूरी की ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया गया है। इनमें कंचनकन्या एक्सप्रेस, कंचनजंघा एक्सप्रेस, पदातिक एक्सप्रेस, दार्जिलिंग मेल, उत्तरबंग एक्सप्रेस, गौर एक्सप्रेस समेत कई महत्वपूर्ण ट्रेनें शामिल हैं। इसके अलावा कुछ ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाया जा रहा है।
इससे पाकुड़, साहिबगंज और आसपास के इलाकों से पश्चिम बंगाल जाने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। खासकर रामपुरहाट, बोलपुर, वर्धमान और कोलकाता की ओर जाने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा से पहले ट्रेन का स्टेटस जांचने की जरूरत है।

युद्धस्तर पर चल रहा मरम्मत कार्य
ट्रैक धंसने की सूचना मिलते ही पूर्व रेलवे ने इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों को मौके पर लगाया। बड़ी मात्रा में स्टोन चिप्स और अन्य सामग्री डालकर ट्रैक के नीचे धंसी मिट्टी को मजबूत करने का काम किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों की निगरानी में मरम्मत कार्य लगातार जारी है।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित हिस्से में ट्रैक की स्थिति को देखते हुए कुछ सेवाओं को नियंत्रित गति से चलाया जा रहा है, जबकि कुछ ट्रेनों का रूट बदला गया है। रेलवे की प्राथमिकता पहले ट्रैक को पूरी तरह सुरक्षित करना और उसके बाद सामान्य परिचालन बहाल करना है।
पाकुड़ स्टेशन पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी
ट्रेनों के रद्द और डायवर्ट होने की सूचना से पाकुड़ स्टेशन पर यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। पश्चिम बंगाल के विभिन्न शहरों में इलाज, नौकरी, कारोबार और दूसरे जरूरी कामों से जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।

















